धर्म-अध्यात्म

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कूटरचित है परशुराम जी के क्रोधी होने और क्षत्रिय संघर्ष की बातें

भगवान् परशुरामजी नारायण का अवतार हैं, ऋषि हैं, गुरू हैं । उनका गुस्सा रोष है, क्रोध नहीं । उनके बारे में संस्कृत में रोष शब्द ही आया है जिसका हिन्दी अनुवाद क्रोध के रूप में करके भ्रान्तियाँ फैलाईं गई।

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सामाजिक समरसता और आध्यात्मिकता के प्रतीक संत सेन महाराज

भारत संत परम्परा की भूमि है, भक्ति काल में अनेक संत हुए जिन्होंने समाज का मार्गदर्शन किया। भारतीय संत परंपरा

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पृथ्वी मेरी माता है और मैं उसका पुत्र हूँ : पृथ्वी दिवस विशेष

हमारी सनातन संस्कृति में पृथ्वी और प्रकृति को केवल भौतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवंत, पूज्य और मातृस्वरूप माना गया है। वेदों, उपनिषदों और पुराणों में प्रकृति के प्रति गहन श्रद्धा, संरक्षण और सह-अस्तित्व की भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।

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युवाओं के लिए बल, बुद्धि और भक्ति के प्रेरणा स्रोत : हनुमान जी

हनुमान जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह युवाओं के लिए आत्म-जागरण का अवसर है। इस दिन हनुमान जी के गुणों को याद करके और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेकर युवा अपने जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।

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आज की दुनिया के लिए शांति और संतुलन का रास्ता : महावीर स्वामी का दर्शन

महावीर स्वामी, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर, एक महान आध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक थे, जिनकी शिक्षाएं आज भी उतनी ही सार्थक और प्रासंगिक हैं, जितनी उस समय थीं, जब उन्होंने इन्हें समाज के समक्ष रखा।

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राम से बड़ा राम का नाम : संदर्भ छत्तीसगढ़

समूचा छत्तीसगढ़वासी रामनवमीं को बड़ी श्रद्धा के साथ मनाते हैं। इस दिन शुभ लग्न मानकर सभी शुभकार्य करते हैं। शादियां और गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य सम्पन्न होते हैं। छत्तीसगढ़ के रामरमिहा लोग अपने पूरे शरीर में राम नाम गुदवाकर श्रीराम नाम की पूजा-अर्चना करते हैं। वे निर्गुण राम को मानते हैं। उनका कहना है के राम से बड़ा राम का नाम है।

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