धर्म-अध्यात्म

futuredधर्म-अध्यात्म

आमलकी व्रत और रंगभरी उत्सव का सांस्कृतिक महत्व

इसी मधुर ऋतु परिवर्तन के बीच एक तिथि आती है जो संयम और उत्सव दोनों को साथ लेकर चलती है। यह है फाल्गुन शुक्ल एकादशी। यही दिन आमलकी एकादशी के रूप में भी जाना जाता है और काशी की परंपरा में रंगभरी एकादशी के रूप में भी मनाया जाता है।

Read More
futuredधर्म-अध्यात्म

दया, प्रेम और समन्वय के प्रतीक संत दादू दयाल

भारतीय संत परंपरा में कुछ ऐसे नाम हैं जिनकी उपस्थिति केवल इतिहास की पंक्तियों में सीमित नहीं रहती, बल्कि लोकमानस की धड़कनों में बस जाती है। संत दादू दयाल उन्हीं दिव्य व्यक्तित्वों में से एक हैं।

Read More
futuredधर्म-अध्यात्म

प्रेम के वसंत का दिव्य उत्सव फुलेरा दूज

फुलेरा दूज ब्रज भूमि में मनाया जाने वाला फूलों की होली का दिव्य उत्सव है, जो राधा कृष्ण के मिलन, प्रेम, भक्ति और वसंत की कोमल अनुभूति को जीवंत करता है।

Read More
futuredधर्म-अध्यात्म

भारतीय सभ्यता के मूल में शिव तत्व : शिवरात्रि विशेष

यह आलेख भारतीय सभ्यता की जड़ों में स्थित शिव-तत्त्व का दार्शनिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें प्रकृति, समरसता, आध्यात्मिकता और परिवर्तन के दृष्टिकोण को समझाया गया है।

Read More
futuredधर्म-अध्यात्महमारे नायक

वैदिक चेतना से सामाजिक क्रांति तक भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत महर्षि दयानंद सरस्वती

महर्षि दयानंद सरस्वती ने उन्नीसवीं सदी में वेदों की ओर लौटने का आह्वान करते हुए सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वास और जातिगत भेदभाव के विरुद्ध व्यापक आंदोलन चलाया। आर्य समाज की स्थापना और शिक्षा सुधार के माध्यम से उन्होंने भारतीय पुनर्जागरण को नई दिशा दी।

Read More
futuredधर्म-अध्यात्म

भई प्रगट कुमारी भूमि-विदारी जन हितकारी भयहारी : माता जानकी जयंती विशेष

माता सीता के जन्म, जीवन और धरती में समाने की प्रतीकात्मकता के माध्यम से भारतीय दर्शन में नारी और प्रकृति के अविभाज्य संबंध का गहन विवेचन।

Read More