आमलकी व्रत और रंगभरी उत्सव का सांस्कृतिक महत्व
इसी मधुर ऋतु परिवर्तन के बीच एक तिथि आती है जो संयम और उत्सव दोनों को साथ लेकर चलती है। यह है फाल्गुन शुक्ल एकादशी। यही दिन आमलकी एकादशी के रूप में भी जाना जाता है और काशी की परंपरा में रंगभरी एकादशी के रूप में भी मनाया जाता है।
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