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भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर, 1 जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कबीरधाम जिले के भोरमदेव धाम में आयोजित कार्यक्रम में भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने नववर्ष 2026 की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि नए वर्ष की शुरुआत ऐसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कार्य से होना छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य की बात है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना राज्य की प्राचीन धरोहर को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का प्रतीक है। कबीरधाम जिले के भोरमदेव धाम में महादेव शिव की आराधना, अतुलनीय प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एक साथ दिखाई देती है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत इस परियोजना का भूमिपूजन किया गया है। लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से यह कॉरिडोर वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नए वर्ष की इससे बेहतर शुरुआत नहीं हो सकती थी और इस परियोजना के लिए उन्होंने प्रदेशवासियों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भोरमदेव की महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।

भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरे-भरे वनांचल के मध्य स्थित यह मंदिर “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” कहलाता है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि हजार वर्षों की साधना, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। यहाँ भगवान शिव की पूजा भोरमदेव के रूप में की जाती है, जहाँ शैव दर्शन, लोक आस्था और आदिवासी परंपराएँ मिलकर भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

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उन्होंने कहा कि सावन माह में निकलने वाली कांवड़ यात्रा यहाँ की महत्वपूर्ण परंपरा है और स्वयं उन्हें कांवड़ियों के स्वागत का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल और छेरकी महल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण भव्य शिल्पाकृतियाँ खजुराहो की कला से तुलना योग्य हैं। नागवंशी शासनकाल में निर्मित नागर शैली की यह वास्तुकला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास, कला और सामाजिक जीवन का भी सशक्त साक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि पर यह स्थल हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जहाँ आदिवासी परंपराओं और शैव प्रथाओं का अनोखा संगम देखने को मिलता है। मड़वा महल, जिसे विवाह मंडप से जोड़ा जाता है, तथा छेरकी महल की दीवारों पर अंकित वन और नदी से संबंधित आकृतियाँ प्रकृति-निष्ठ जीवनदर्शन को दर्शाती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भोरमदेव क्षेत्र धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र है, जिसे सरकार व्यापक रूप से विकसित कर रही है। राज्य में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है। नई पर्यटन नीति और होम-स्टे पॉलिसी के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं।

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उन्होंने बताया कि बस्तर दशहरा सहित छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानीय उत्सवों ने प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। नाचा परंपरा, 13 पारंपरिक वाद्ययंत्र, लोकनृत्य और गीत छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के परिचायक हैं। धार्मिक आस्थाओं में भगवान राम को यहाँ ‘भाँचा राम’ या ‘वनवासी राम’ के रूप में पूजा जाता है, क्योंकि उनके वनवास के लगभग दस वर्ष दंडकारण्य क्षेत्र में व्यतीत हुए थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सड़कों, रेल और हवाई सेवाओं के विस्तार से दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँच आसान होगी और पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 7.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों को नई दिशा मिलेगी।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भूमिपूजन के बाद सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कबीरधाम जिले और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा था, जिसे समाप्त करने की दिशा में राज्य निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है।

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उन्होंने कहा कि सुशासन का प्रभाव आज देश-दुनिया में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल, बिजली, बैंक खाता और रोजगार जैसी सुविधाएँ गरीबों तक पहुँच रही हैं।

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि लगभग एक हजार वर्ष पुराना भोरमदेव मंदिर ऐतिहासिक धरोहर है और कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से इसे आने वाले हजार वर्षों तक संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना कबीरधाम जिले को नई पहचान देगी और प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल की एक स्थायी स्मृति बनेगी।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा लगातार क्षेत्र का दौरा कर विकास कार्यों को गति दी जा रही है। उन्होंने बताया कि भोरमदेव महोत्सव के दौरान स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे उसी दिन स्वीकृति मिली और आज उसका भूमिपूजन संपन्न हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर का विकास कार्य भी प्रारंभ किया जा रहा है।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री तोखन साहू, सांसद संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक भावना बोहरा, पर्यटन मंडल अध्यक्ष नीलू शर्मा, गौ सेवा आयोग अध्यक्ष विशेषर पटेल, राज्य कृषक कल्याण परिषद अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।