भिलाई में तीन दिवसीय कबीर महायज्ञ में गूंजे संत कबीर के अमूल्य संदेश
इस्पात नगरी भिलाई के निर्मल ज्ञान मंदिर (कबीर आश्रम) परिसर में संत कबीर के 57वें वार्षिक स्थापना महोत्सव का तीन दिवसीय आध्यात्मिक सदज्ञान महायज्ञ संपन्न हुआ। भजन, सत्संग और प्रवचनों के माध्यम से पूरे आयोजन में कबीर के दोहों और उनके संदेशों की गूंज बनी रही।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संत अभय साहेब (संस्थापक, श्री कबीर पारख निकेतन, भागलपुर, बिहार) ने प्रवचन के दौरान मनुष्य जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “मनुष्य जीवन परमार्थ के लिए मिला है, स्वार्थ के लिए नहीं। हमें जीवन को कर्म और सेवा के माध्यम से सार्थक बनाना चाहिए, न कि केवल धन के पीछे भागकर।” साथ ही उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम् के महत्व को सरल भाषा में भक्तों के समक्ष प्रस्तुत किया।
महायज्ञ में हरियाणा के संत गुलशन साहेब, छत्तीसगढ़ के धमतरी के संत हिरेंद्र साहेब और नागपुर (महाराष्ट्र) के संत यतींद्र साहेब ने भी अपने आध्यात्मिक विचार साझा किए। छत्तीसगढ़ के कई कबीर आश्रमों से संत और साध्वी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
समापन समारोह में शिक्षा और समाज के विभिन्न क्षेत्रों की उल्लेखनीय प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। कबीर पंथियों ने देह दान की घोषणा करके मानवता और सेवा का प्रेरक संदेश भी दिया। साथ ही, हाईटेक हॉस्पिटल, स्मृति नगर द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया और एक अन्य समाजसेवी संस्था ने रक्त परीक्षण शिविर का आयोजन किया।
तीन दिनों तक महोत्सव के दौरान ध्वजारोहण, मंगलाचरण, गुरु वंदना और भजन-सत्संग के कार्यक्रम आयोजित किए गए। भजन संध्या में जागृति सार्वा, साध्वी सुमन, राधेश्याम साहू, गीतांजलि, डालेश्वरी और चोवाराम सहित दूर-दूर से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी।
आयोजन को सफल बनाने में आश्रम ट्रस्ट और प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों सहित उत्तम साहू, दलजीत सिंह, जितेन्द्र कुमार, फूलचंद साहू, शिवकुमार साव, भोपाल कलिहारी, चंद्रमोहन साव, डॉ. दीनदयाल साहू और कई अन्य कबीरपंथियों ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
संत अभय साहेब ने समापन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं से अपील की कि संत कबीर के विचारों को जीवन में उतारकर समाज में सद्भाव और सेवा का संदेश फैलाया जाए।

