भारत आने वाला ईरानी कच्चा तेल टैंकर अचानक चीन की ओर मुड़ा, भुगतान विवाद की आशंका
भारत के लिए रवाना हुआ ईरानी कच्चे तेल से भरा एक टैंकर गुजरात तट के करीब पहुंचने के बाद अचानक अपना रास्ता बदलकर चीन की ओर मुड़ गया। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, “पिंग शुन” नामक यह टैंकर, जो वडिनार पोर्ट की ओर बढ़ रहा था, अब चीन के शानदोंग प्रांत के डोंगयिंग बंदरगाह को अपना नया गंतव्य बता रहा है।
बताया जा रहा है कि टैंकर में करीब 6 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल लदा हुआ था और यह गुरुवार तक गुजरात पहुंचने वाला था। हालांकि, अंतिम समय में जहाज ने अपना रुख दक्षिण की ओर मोड़ लिया और दिशा बदल दी। व्यापार से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इसके पीछे भुगतान से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं।
सात साल बाद संभावित वापसी पर लगा ब्रेक
भारत ने मई 2019 के बाद से ईरान से कच्चा तेल आयात नहीं किया है। ऐसे में इस टैंकर का भारत की ओर आना संभावित रूप से लंबे अंतराल के बाद आयात की वापसी का संकेत माना जा रहा था। लेकिन दिशा बदलने से यह उम्मीद फिलहाल अधर में लटक गई है।
अमेरिकी राहत के बावजूद चुनौतियां बरकरार
अमेरिका ने 21 मार्च को एक महीने के लिए उन टैंकरों पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी थी, जिनमें पहले से ईरानी तेल लदा हुआ है। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ाना और तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना था। इस छूट के तहत 19 अप्रैल तक ऐसे तेल के लेनदेन की अनुमति दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, “पिंग शुन” पर लदा तेल मार्च की शुरुआत में ईरान के खार्ग द्वीप से लोड हुआ था, इसलिए यह मौजूदा प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आता।
भुगतान शर्तें बनीं बड़ी बाधा
विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के समय में ईरानी तेल व्यापार में भुगतान की शर्तें सख्त हो गई हैं। पहले जहां 30-60 दिन का क्रेडिट मिलता था, अब तत्काल या कम समय में भुगतान की मांग की जा रही है। इसी कारण कई सौदों पर असर पड़ रहा है।
ईरान अब भी अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम SWIFT से बाहर है, जिसके चलते वैश्विक बैंक और वित्तीय संस्थाएं लेनदेन में सतर्कता बरतती हैं। यही वजह है कि चीन के अलावा अन्य देशों के लिए ईरानी तेल खरीदना जटिल बना हुआ है।
चीन बना प्रमुख खरीदार
पिछले कई वर्षों से ईरान के 90% से अधिक तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन को ही जाता रहा है। भारत जैसे देश, जो पहले ईरानी तेल के बड़े खरीदार थे, प्रतिबंधों और भुगतान समस्याओं के चलते इससे दूर हो गए।
भारत के लिए अवसर भी
विश्लेषकों का मानना है कि अगर भुगतान और व्यापारिक शर्तें अनुकूल हो जाएं, तो भारत फिर से ईरानी तेल आयात शुरू कर सकता है—जैसे हाल के महीनों में उसने रूसी तेल आयात बढ़ाया है। वैश्विक आपूर्ति की तंगी के बीच हर बैरल की अहमियत बढ़ गई है।
हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य में बाधित आवाजाही ने भी तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। भारत अपनी कुल जरूरत का 88% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में ऐसे घटनाक्रम उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

