futuredखबर राज्यों सेताजा खबरें

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची विवाद, 60 लाख से अधिक नामों की जांच में अब तक सिर्फ 10.82% मामलों का निपटारा

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी की गई मतदाता सूची को लेकर विवाद लगातार बना हुआ है। सूची जारी होने के एक सप्ताह बाद भी जांच के दायरे में आए करीब 60.06 लाख मतदाताओं में से अब तक केवल 6.5 लाख मामलों का ही निपटारा हो पाया है। यह कुल मामलों का लगभग 10.82 प्रतिशत है।

जिन मतदाताओं के नाम “जांचाधीन” श्रेणी में रखे गए हैं, वे फिलहाल मतदाता सूची में बने हुए हैं, लेकिन जब तक उनके मामलों पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक वे आगामी विधानसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नियुक्त न्यायिक अधिकारी इन मामलों की समीक्षा कर रहे हैं और उनके निर्णय के आधार पर ही मतदाताओं के नाम आगे की पूरक सूची में बनाए रखे जाएंगे या हटाए जाएंगे।

700 न्यायिक अधिकारियों को दी गई जिम्मेदारी

इन मामलों की सुनवाई और जांच के लिए करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। इनमें से लगभग 200 अधिकारी पड़ोसी राज्यों झारखंड और ओडिशा से आने वाले हैं। हालांकि चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अभी तक झारखंड और ओडिशा से कोई भी न्यायिक अधिकारी नहीं पहुंचा है।

See also  रायपुर–जगदलपुर–हैदराबाद हवाई सेवा फिर शुरू करने की तैयारी, प्रशासन और एयरलाइन के बीच चर्चा तेज

उन्होंने बताया कि फिलहाल 505 न्यायिक अधिकारी ही इन मामलों के निपटारे में लगे हुए हैं। राज्य सरकार उनके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कर रही है। जानकारी के अनुसार झारखंड से करीब 100 और ओडिशा से भी लगभग 100 न्यायिक अधिकारी शनिवार तक पहुंच सकते हैं, जिनमें कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीश भी शामिल हैं।

दस्तावेजों की दोहरी जांच से बढ़ रही देरी

चुनाव कार्यालय के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि मामलों के निपटारे में समय लगने का कारण जांच की जटिल प्रक्रिया है। न्यायिक अधिकारी केवल ऑनलाइन अपलोड किए गए दस्तावेजों की ही जांच नहीं कर रहे हैं, बल्कि मतदाताओं द्वारा सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किए गए कागजी दस्तावेजों से भी उनका मिलान कर रहे हैं। कई मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड और कागजी दस्तावेजों में अंतर भी पाया गया है, जिसके कारण प्रक्रिया और लंबी हो रही है।

अब तक करीब 75 प्रतिशत मामलों की प्रारंभिक जांच पूरी कर ली गई है। चुनाव आयोग ने अधिकारियों को एक विशेष एप्लिकेशन भी उपलब्ध कराया है, जिसमें त्रुटि होने पर रिकॉर्ड को संशोधित करने का विकल्प दिया गया है।

See also  तेलंगाना में 124 माओवादियों का सामूहिक समर्पण, उग्रवाद को बड़ा झटका

राजनीतिक दलों ने की प्रक्रिया तेज करने की मांग

पूरे मामले के निपटारे के लिए अभी कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई है। इस वजह से मतदाताओं और राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव आयोग पर प्रक्रिया को तेज करने का दबाव बढ़ रहा है।

गुरुवार को वाम मोर्चा, कांग्रेस, इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) और हाल ही में बने जस्टिस यूनिटी पार्टी (जूप) के प्रतिनिधिमंडलों ने अलग-अलग मुलाकात कर मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल से मामलों के जल्द निपटारे की मांग की।