मां दंतेश्वरी के आशीर्वाद से बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ, 12 विधाओं में तीन चरणों में होगा भव्य आयोजन
रायपुर, 2 जनवरी 2026/ बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन इस वर्ष भी भव्य और आकर्षक रूप में किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात बस्तर पंडुम 2026 के लोगो और थीम गीत का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री ने नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। यह जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने का सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि मां दंतेश्वरी के पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ होना पूरे बस्तर के लिए गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान उसकी आदिवासी परंपराओं में निहित है। नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुड़ियों के माध्यम से बस्तर की संस्कृति आज भी जीवंत है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष बस्तर पंडुम के समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति रही थी। इस वर्ष राष्ट्रपति, केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री तथा भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को आमंत्रित करने की तैयारी है, ताकि बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान मिल सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष बस्तर पंडुम की प्रतियोगिताओं में विधाओं की संख्या सात से बढ़ाकर बारह कर दी गई है। इनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा-पद्धति के साथ शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को भी शामिल किया गया है। प्रतियोगिताएं तीन चरणों—जनपद, जिला और संभाग स्तर—पर आयोजित होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। बस्तर अब केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शांति, पर्यटन और विकास का प्रतीक भी बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बस्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है और यह उत्सव बताता है कि बस्तर अब संघर्ष से नहीं, बल्कि सृजन और उत्सव से पहचाना जाएगा।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘पंडुम’ का अर्थ पर्व होता है और बस्तर में पर्वों की समृद्ध परंपरा रही है। किसी भी आयोजन की शुरुआत माता के आशीर्वाद से की जाती है, इसी परंपरा के अनुसार बस्तर पंडुम की शुरुआत मां दंतेश्वरी के मंदिर से की गई है। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति स्थापना के प्रयास सफल हो रहे हैं और मार्च 2026 तक लाल आतंक समाप्त हो जाएगा।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति और परंपरा प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। दंडकारण्य क्षेत्र का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व रहा है, जहां भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान समय व्यतीत किया था। ऐसे पावन क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने का प्रयास बस्तर पंडुम के माध्यम से किया जा रहा है।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार लगातार दूसरे वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन कर रही है और इस वर्ष बारह विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने संभाग के वरिष्ठ मांझी, चालकी, गायता, पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजनों और पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकारों के साथ संवाद किया। कार्यक्रम को बस्तर सांसद महेश कश्यप और दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी ने भी संबोधित किया।
उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में किया जाएगा। जनपद स्तरीय कार्यक्रम 10 से 20 जनवरी, जिला स्तरीय 24 से 29 जनवरी और संभाग स्तरीय आयोजन 2 से 6 फरवरी तक प्रस्तावित है। इस आयोजन में बस्तर संभाग के सात जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और एक नगर निगम क्षेत्र को शामिल किया गया है। संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को इस आयोजन का नोडल विभाग बनाया गया है।
