मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा बस्तर के समग्र विकास का ब्लूप्रिंट
नई दिल्ली, 7 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट कर बस्तर क्षेत्र के समग्र और दीर्घकालिक विकास का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। इस मुलाकात में मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के समाप्त होने के बाद प्रदेश में स्थापित शांति के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया और बस्तर के भविष्य को नई दिशा देने वाले अनेक महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का आमंत्रण भी दिया, जहां उनकी उपस्थिति में कई बड़ी विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण प्रस्तावित है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि बस्तर सहित राज्य के अनेक क्षेत्रों में नक्सलवाद की समस्या अब समाप्त हो चुकी है और सामान्य जनजीवन में स्थिरता और विश्वास का वातावरण निर्मित हुआ है। उन्होंने बताया कि शांति की स्थापना के बाद अब राज्य सरकार का पूरा ध्यान बस्तर के तीव्र और समग्र विकास पर केंद्रित है, ताकि क्षेत्र के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का लाभ व्यापक रूप से मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए जा रहे हैं। बस्तर में एजुकेशन सिटी, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल तथा मेडिकल कॉलेज की स्थापना की प्रक्रिया तेज की गई है। इसके साथ ही इंद्रावती नदी पर बैराज, रेल लाइन परियोजनाएं तथा एयरपोर्ट विस्तार जैसी योजनाओं के माध्यम से क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। इन परियोजनाओं के माध्यम से बस्तर को देश के अन्य क्षेत्रों से बेहतर ढंग से जोड़ा जा सकेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत विकास ब्लूप्रिंट ‘सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज’ रणनीति पर आधारित है। इस रणनीति का उद्देश्य बस्तर क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना, लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना, आवश्यक सेवाओं को सुगम बनाना, नागरिकों को सशक्त करना तथा शासन और समाज के बीच संवाद को मजबूत करना है। इस व्यापक दृष्टिकोण के तहत दूरस्थ क्षेत्रों तक सड़क नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे कार्यों को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे दूरस्थ गांवों तक पहुंच आसान होगी। मुख्यमंत्री ने 61 नई परियोजनाओं के लिए विशेष केंद्रीय सहायता की मांग भी रखी है।
ऊर्जा और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योजनाएं तैयार की गई हैं। हर घर तक बिजली पहुंचाने के प्रयासों को तेज किया जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में 45 पोटा केबिन विद्यालयों को स्थायी भवनों में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। युवाओं के शारीरिक विकास और खेल प्रतिभा को प्रोत्साहन देने के लिए 15 स्टेडियम और 2 मल्टीपर्पज हॉल बनाए जाने की योजना है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार किया जा रहा है और चिकित्सकों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल का निर्माण भी प्रस्तावित है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में भी बड़े निवेश की योजना है। इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में दो प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनसे लगभग 31,840 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इन परियोजनाओं से कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। बस्तर की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार प्राथमिकता में रखा गया है।
आजीविका और आय वृद्धि के लिए राज्य सरकार ने तीन वर्षीय कार्ययोजना तैयार की है, जिसके अंतर्गत वर्ष 2029 तक 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ योजना के माध्यम से विकास कार्यक्रमों का विस्तार किया जा रहा है। पहले 10 जिलों में लागू इस योजना को अब 7 जिलों के साथ 3 नए जिलों गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी तथा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई तक विस्तारित किया जा रहा है। इस विस्तार से अधिक परिवारों को योजनाओं का लाभ मिल सकेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
‘अंजोर विजन 2047’ तथा ‘विकसित भारत 2047’ की अवधारणा के अनुरूप राज्य में स्टार्टअप नीति को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2030 तक 5,000 स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के अवसर मिलेंगे। इससे रोजगार के नए क्षेत्र विकसित होंगे और स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा।
पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए अनेक पहल की जा रही हैं। चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। एडवेंचर टूरिज्म, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी परियोजनाएं पर्यटकों को आकर्षित करने में सहायक होंगी। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे सांस्कृतिक और खेल आयोजन क्षेत्र की पहचान को मजबूत कर रहे हैं। कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से एक लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से लगभग 40 हजार युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ है।
नक्सलवाद से मुक्त बस्तर के विकास को गति देने के लिए ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम को भी महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिविर आयोजित किए जाएंगे, जहां अधिकारी स्वयं उपस्थित रहकर लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराएंगे। शिविरों में आवश्यक दस्तावेज तैयार किए जाएंगे और नागरिकों की समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाएं सीधे जनता तक पहुंचे और लोगों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कठिनाई का सामना न करना पड़े।
प्रधानमंत्री के प्रस्तावित बस्तर दौरे के दौरान जिन प्रमुख परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण की योजना है, उनमें रावघाट से जगदलपुर रेल लाइन, जगदलपुर एयरपोर्ट का विस्तार, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज तथा जगरगुंडा और ओरछा में एजुकेशन सिटी जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से बस्तर क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में बस्तर विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। नक्सलवाद से मुक्त वातावरण में अब क्षेत्र के लोगों में भय के स्थान पर विश्वास और आशा का वातावरण निर्मित हुआ है। यह विकास ब्लूप्रिंट बस्तर को शांति, समृद्धि और अवसरों की दिशा में आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
