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नक्सल अंधेरे से लोकतंत्र की रोशनी: बस्तर के 47 गांवों में लहराएगा तिरंगा

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में वर्षों तक नक्सल हिंसा के साए में रहे इलाकों में अब बदलाव की रोशनी साफ नजर आने लगी है। माओवादी हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित रहे बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के 47 ऐसे गांव, जहां अब तक राष्ट्रीय पर्व मनाने की कल्पना भी संभव नहीं थी, वहां इस वर्ष 26 जनवरी को पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। यह केवल एक समारोह नहीं, बल्कि बस्तर में लोकतंत्र की मजबूत वापसी का प्रतीक होगा।

पिछले दो वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की साझा रणनीति, सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से बस्तर के हालात में तेजी से सुधार हुआ है। नक्सल प्रभावित अंचलों में 59 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिससे प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की पहुंच गांव-गांव तक सुनिश्चित हुई है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि जहां वर्ष 2025 में 53 गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया था, वहीं अब 47 और गांव इस ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ने जा रहे हैं।

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बीजापुर जिले के पुजारीकांकेर, गुंजेपर्ती, भीमाराम, कस्तुरीपाड, ताड़पाला हिल्स, उलूर, चिल्लामरका, काड़पर्ती, पिल्लूर, डोडीमरका, संगमेटा, तोडका, कुप्पागुड़ा, गौतपल्ली, पल्लेवाया और बेलनार जैसे गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा।
नारायणपुर जिले के एडजूम, इदवाया, आदेर, कुडमेल, कोंगे, सितराम, तोके, जटलूर, धोबे, डोडीमार्का, पदमेटा, लंका, परीयादी, काकुर, बालेबेडा, कोडेनार, अदिंगपार, मांदोडा, जटवार और वाडापेंदा गांव भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनेंगे।
इसी तरह सुकमा जिले के गोगुंडा, नागाराम, बंजलवाही, वीरागंगरेल, तुमालभट्टी, माहेता, पेददाबोडकेल, उरसांगल, गुंडराजगुंडेम और पालीगुड़ा गांवों में भी पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा।

यह बदलाव उन इलाकों में एक नई शुरुआत का संकेत है, जहां कभी डर और हिंसा के कारण सामान्य जीवन ठप था। पूरे बस्तर क्षेत्र में अब 100 से अधिक सुरक्षा कैंप सक्रिय हैं, जिनकी मौजूदगी ने न केवल सुरक्षा का भरोसा बढ़ाया है, बल्कि विकास के रास्ते भी खोले हैं। सड़कों, स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं, संचार नेटवर्क और बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है।

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सुरक्षाबलों और प्रशासन की निरंतर उपस्थिति से ग्रामीणों में आत्मविश्वास लौटा है। जिन गांवों में कभी राष्ट्रीय पर्व मनाना प्रतिबंधित था, वहां अब लोग स्वयं आगे बढ़कर तिरंगा फहराने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने को उत्साहित हैं। यह परिवर्तन बस्तर को माओवादी हिंसा के दौर से बाहर निकालने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

राज्य सरकार का फोकस अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि स्थायी विकास पर है। स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन, बैंकिंग सेवाओं की बहाली, मोबाइल टावरों की स्थापना और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दूरस्थ गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। हाल ही में जगरगुंडा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बैंकिंग सेवाएं फिर से शुरू होना इसका उदाहरण है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि जहां पहले हिंसा के कारण विकास रुका हुआ था, वहीं अब सुशासन की सरकार बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर को माओवाद के भय से मुक्त कर विश्वास और प्रगति के नए युग की ओर ले जा रही है।

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गणतंत्र दिवस 2026 पर इन 47 गांवों में पहली बार फहराने वाला तिरंगा न केवल राष्ट्रीय पर्व का उत्सव होगा, बल्कि यह शांति, लोकतंत्र और विकास की जीत का सशक्त संदेश भी देगा।