Author: News Editor

futuredधर्म-अध्यात्म

भारतीय संस्कृति और धर्म में गणेश जी का स्थान एवं महत्व

विघ्ननाशक और सिद्धि विनायक गणेश या गणपति की विनायक के रूप में पूजन की परंपरा प्राचीन है किंतु पार्वती अथवा गौरीनंदन गणेश का पूजन बाद में प्रारंभ हुआ। ब्राह्मण धर्म के पांच प्रमुख सम्प्रदायों में गणेश जी के उपासकों का एक स्वतंत्र गणपत्य सम्प्रदाय भी था जिसका विकास पांचवीं से आठवीं शताब्दी के बीच हुआ।

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futuredलोक-संस्कृति

आस्था और प्रेम का प्रतीक तीजा तिहार

लोक परंपरा के अनुसार, तीजा के अवसर पर बेटियों को साड़ी उपहार में दी जाती है। छत्तीसगढ़ में एक कहावत भी प्रचलित है: “मइके के फरिया अमोल”—यानि मायके से मिले कपड़े का टुकड़ा भी अनमोल होता है। इस दिन माताएँ अपनी बेटियों के लिए चूड़ियाँ, फीते और सिन्दूर भी लाती हैं। तीजा की इस अनोखी परंपरा को निभाने का महत्व छत्तीसगढ़ के लोक जीवन में गहराई से बसा हुआ है।

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futuredसाहित्य

पुस्तक -चर्चा आँसू ल पी थे महतारी ; एकांत श्रीवास्तव का कविता -संग्रह ‘अँजोर

छत्तीसगढ़ी नई कविताओं के हिंदी अनुवाद सहित एकांत श्रीवास्तव का नया कविता संग्रह ‘अँजोर’ कविता की दुनिया में नई रौशनी लेकर आया है। इस संग्रह में 42 छत्तीसगढ़ी कविताओं के साथ उनके हिंदी अनुवाद भी दिए गए हैं। कविताओं में छत्तीसगढ़ के गाँवों और लोकजीवन की सोंधी महक महसूस की जा सकती है। संग्रह को कवि ने त्रिलोचन की कृति ‘अमोला’, छत्तीसगढ़ की मिट्टी कन्हार, और कोरोना काल में खोए प्रियजनों को समर्पित किया है। संग्रह में ‘पियास’ जैसी कविताएँ जीवन और समाज के गहरे मर्म को छूती हैं, जो अपनी माटी से जुड़ी भावुकता और संवेदनशीलता का परिचय देती हैं।

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futuredसमाज

भारतीय शिक्षा प्रणाली के शिल्पकार डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन : शिक्षक दिवस विशेष

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का शिक्षा के क्षेत्र में योगदान अद्वितीय और अतुलनीय है। उन्होंने शिक्षा को केवल जानकारी प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका माना। उनके विचारों और प्रयासों ने भारतीय शिक्षा प्रणाली को नई दिशा और दृष्टिकोण दिया। वे आज भी एक आदर्श शिक्षक और शिक्षाविद् के रूप में याद किए जाते हैं, जिनका जीवन और कार्य हमें शिक्षा के महत्व को समझने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता है।

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futuredसाहित्य

रायगढ़ की साहित्यिक समृद्धि के सूत्रधार : डॉ. बल्देवप्रसाद मिश्र

छत्तीसगढ़ का पूर्वी सीमान्त आदिवासी बाहुल्य जिला रायगढ़ केवल सांस्कृतिक ही नहीं बल्कि साहित्यिक दृष्टि से भी सम्पनन रहा है।

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futuredताजा खबरें

प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी के सदस्यों का कश्मीर चुनाव मैदान में उतरने का अर्थ?

जम्मू कश्मीर में हो रहे विधानसभा चुनावों से एक चौंकाने वाली खबर आई है। प्रतिबंधित जमायते इस्लामी के पाँच पूर्व पदाधिकारियों ने निर्दलीय रूप से अपनी उम्मीदवारी घोषित कर दी है। इस संगठन ने 1987 के बाद से किसी चुनाव में हिस्सा नहीं लिया था और 1993 से 2003 के बीच हुये हर चुनाव को “हराम” बताकर बहिष्कार की अपील की थी। लेकिन जमात ने इस बार अपनी रणनीति में बदलाव किया है।

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