विश्वशांति में भारत की भूमिका-1
युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों के माध्यम से जानिए कि भविष्य के वैश्विक परिदृश्य में भारत किस प्रकार आध्यात्मिक चेतना, नैतिक नेतृत्व और विश्व कल्याण की महती भूमिका निभाने वाला है।
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Read Moreक्या जैव विविधता का ह्रास सीधे मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है? वेदों और पुराणों की दृष्टि से जानिए प्रकृति, रोग और जीवन के गहरे संबंध को समझने का वैज्ञानिक आधार।
Read Moreवेदों और पुराणों में निहित प्रकृति संरक्षण की अवधारणा आज के पर्यावरण संकट के समाधान का मार्ग दिखाती है। जानिए कैसे भारतीय परंपरा में जैव विविधता, संतुलन और सतत विकास का गहरा संबंध है।
Read Moreराजा राममोहन राय की जयंती पर यह आलेख अंग्रेज़ी शिक्षा, मैकॉले नीति, उपनिवेशवादी मानसिकता और भारतीय ज्ञान परंपरा पर गंभीर प्रश्न उठाता है। क्या आधुनिकता के नाम पर भारतीय सभ्यता की जड़ों को कमजोर किया गया?
Read Moreचाय केवल एक पेय नहीं, बल्कि रिश्तों, संवाद, यादों और भारतीय जीवनशैली की आत्मीय संस्कृति का प्रतीक है। अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस पर पढ़िए चाय से जुड़े भावनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक पक्षों पर आधारित संवेदनशील आलेख।
Read Moreक्या सती प्रथा वास्तव में भारतीय संस्कृति की मूल पहचान थी? ऋग्वेद के “जीवलोक” मंत्र, वैदिक दृष्टि, औपनिवेशिक इतिहास लेखन और भारतीय सभ्यता में स्त्री की भूमिका के संदर्भ में इस विमर्श का संतुलित विश्लेषण।
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