Author: News Editor

futuredराजनीति

भारत में नागरिकता का प्रमाण आखिर है क्या ?

आज सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि पासपोर्ट नहीं, तो फिर क्या? इस प्रश्न का उत्तर जितनी शीघ्रता से सरकार देगी, उतनी ही शीघ्रता से भ्रम समाप्त होगा और नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होगा। लोकतंत्र में नागरिक से प्रमाण मांगना अनुचित नहीं है, लेकिन उससे पहले यह बताना अनिवार्य है कि वह प्रमाण आखिर है क्या?

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futuredसमाज

अदृश्य नशे के जाल में भारत के युवा

डिजिटल नशे की बढ़ती समस्या पर आधारित यह तथ्यात्मक एवं भावनात्मक आलेख बताता है कि कैसे स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों और भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं। जानिए डिजिटल लत के कारण, दुष्परिणाम और समाधान।

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futuredविविध

राम मंदिर का धन, आस्था की कसौटी और जवाबदेही की अनिवार्यता

अयोध्या राम मंदिर के चंदा विवाद पर पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर आधारित विश्लेषण। आस्था, कानून और मंदिर प्रशासन की विश्वसनीयता पर विशेष लेख।

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futuredराजनीति

जब लोकतंत्र को आधी रात बेड़ियों में जकड़ा गया

25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल ने भारतीय लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों को गहरा आघात पहुँचाया। जानिए आपातकाल के कारण, घटनाक्रम, दमन, प्रतिरोध और उससे मिले लोकतांत्रिक सबक।

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futuredधर्म-अध्यात्म

आस्था और संयम का पर्व निर्जला एकादशी

निर्जला एकादशी का धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक, स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय महत्व जानिए। भीमसेनी एकादशी की कथा, व्रत विधि, दान परंपरा और जल संरक्षण के संदेश पर आधारित विस्तृत आलेख।

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futuredसमाज

प्रेम, विश्वास और बढ़ती क्रूरता का दौर में बदलते रिश्तों के बीच खड़ा एक बेचैन समाज

क्या हम ऐसे दौर में प्रवेश कर चुके हैं जहाँ रिश्तों की असहमति का समाधान संवाद नहीं, बल्कि अपराध बनता जा रहा है? राजा रघुवंशी और केतन अग्रवाल हत्याकांड के बहाने रिश्तों, नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संवाद, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक संवेदनशीलता पर गंभीर चिंतन।

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