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अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने से भारतीय कंपनियों में मचा हड़कंप, क्या होगा अगला बड़ा झटका?

भारत की प्रमुख कंपनियाँ अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने के फैसले के कारण एक बड़े संकट का सामना कर रही हैं। इस निर्णय का असर भारत के प्रमुख उद्योगों, जैसे आईटी, ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल और स्टील कंपनियों पर सीधा और परोक्ष रूप से पड़ सकता है। इसमें आईटी कंपनियाँ टीसीएस और इंफोसिस, वाहन निर्माता टाटा मोटर्स, फार्मा कंपनियाँ सन फार्मा और सिपला, और स्टील निर्माता जैसे टाटा स्टील और नेशनल एल्युमिनियम शामिल हैं।

शेयर बाजार पर असर
इस टैरिफ वृद्धि के कारण भारतीय शेयर बाजार में हलचल देखने को मिली है, जहां फार्मा, आईटी, ऑटोमोबाइल और स्टील कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है, और इससे सेंसेक्स में भी गिरावट आई है। कंपनियों के शेयरों में लगातार गिरावट ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है।

निर्यात पर असर
इस कदम से भारत के निर्यात-निर्भर उद्योगों पर गहरा असर पड़ सकता है, जिससे रोजगार की स्थिति और लाभ के मार्जिन में गिरावट देखने को मिल सकती है। कई विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को अमेरिका से प्रत्यक्ष निर्यात में लगभग 9 से 13 बिलियन डॉलर की कमी का सामना हो सकता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था का लगभग 0.2% से 0.3% है।

आईटी क्षेत्र पर प्रभाव
भारतीय आईटी कंपनियाँ, जो अमेरिका से लगभग 70% निर्यात करती हैं, इस वृद्धि के कारण एक कठिन दौर से गुजर सकती हैं। टीसीएस और इंफोसिस के शेयरों में गिरावट आने के साथ-साथ यह चिंता जताई जा रही है कि अमेरिकी कंपनियाँ आईटी सेवाओं पर खर्च कम कर सकती हैं। इसके अलावा, अगर अमेरिका में मुद्रास्फीति में वृद्धि होती है, तो इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ सकता है, क्योंकि इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति पर भी असर पड़ सकता है।

ऑटोमोबाइल उद्योग पर प्रभाव
टाटा मोटर्स जैसे वाहन निर्माताओं को भी 25% टैरिफ वृद्धि के कारण नुकसान हो सकता है। अमेरिका ने आयातित कारों और हल्के ट्रकों पर टैरिफ बढ़ाया है, जिससे टाटा मोटर्स और उनकी सहायक कंपनी जेएलआर (जगुआर लैंड रोवर) को नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, वाहन घटकों पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाने से कंपनियों को अधिक लागत का सामना करना पड़ेगा, जो कार की कीमतों में वृद्धि का कारण बन सकता है।

फार्मास्युटिकल कंपनियों को जोखिम
भारत की प्रमुख फार्मास्युटिकल कंपनियाँ, जैसे सन फार्मा और सिपला, भी इस बढ़ोतरी से प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि अमेरिका ने फार्मास्युटिकल्स को अपनी प्रतिशोधी टैरिफ नीति में शामिल किया है। भारत, जो अमेरिका को फार्मा उत्पादों का प्रमुख निर्यातक है, को इस निर्णय से नुक्सान हो सकता है।

धातु उद्योग पर दबाव
एल्युमिनियम और स्टील कंपनियाँ, जैसे टाटा स्टील और नेशनल एल्युमिनियम, भी इस वृद्धि से प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि वे अन्य देशों से आने वाले उत्पादों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं।

कपड़ा उद्योग को लाभ
हालांकि, भारतीय वस्त्र उद्योग को इस स्थिति से कुछ फायदा हो सकता है। अमेरिका ने भारतीय वस्त्रों पर 27% की प्रतिशोधी टैरिफ वृद्धि की है, जो अन्य देशों के मुकाबले कम है। इससे भारतीय वस्त्र उत्पादकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है।

आगे का रास्ता
हालांकि टैरिफ वृद्धि से भारतीय कंपनियों को नुकसान हो सकता है, लेकिन कुछ उद्योगों को फायदा भी हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों को इस चुनौती का सामना करने के लिए रणनीतिक तरीके अपनाने होंगे, जैसे कि नए बाजारों में प्रवेश और लागत नियंत्रण उपायों को लागू करना।

कुल मिलाकर, यह फैसला भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है, लेकिन यदि सावधानीपूर्वक योजना बनाई जाए तो इससे निपटा भी जा सकता है।

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