नई ChatGPT इमेज जनरेशन तकनीक से Aadhaar कार्ड की फर्जी तस्वीरों का खतरा: विशेषज्ञों ने उठाई चिंताएं
पिछले सप्ताह OpenAI द्वारा ChatGPT के नए इमेज जनरेशन फीचर की लॉन्चिंग के बाद, इस तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ा है। अब तक उपयोगकर्ताओं ने 700 मिलियन से अधिक चित्र जनरेट किए हैं, जिनमें सबसे प्रमुख उपयोग Studio Ghibli-शैली की पोर्ट्रेट्स बनाना है। हालांकि, ChatGPT की नई क्षमता के बारे में जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ इसके दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ रहा है।
कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने हाल ही में ChatGPT के इमेज जनरेशन फीचर का इस्तेमाल करके फर्जी Aadhaar कार्ड की तस्वीरें साझा की हैं। जहां पहले से ही AI कंपनियों के नए फीचर्स को लेकर दुरुपयोग की चिंता जताई जा रही थी, वहीं अब ChatGPT की फोटो-रियलिस्टिक इमेज बनाने की क्षमता इस समस्या को और बढ़ा सकती है।
फर्जी Aadhaar कार्ड की तस्वीरें
सोशल मीडिया पर कई उपयोगकर्ताओं ने OpenAI के CEO सैम अल्टमैन और टेस्ला के CEO एलोन मस्क की तस्वीरों को भारतीय पहचान पत्र यानी Aadhaar कार्ड पर सुपरइम्पोज़ कर दिया है, जिनमें QR कोड और सही Aadhaar नंबर भी शामिल है। यह तस्वीरें वास्तविक Aadhaar कार्ड के काफी करीब थीं, लेकिन चेहरे की विवरण में कुछ अंतर था। इस तकनीक ने एक नई चिंताजनक स्थिति को जन्म दिया है, जिससे पहचान चुराने और धोखाधड़ी के मामले बढ़ सकते हैं।
ChatGPT की नई इमेज जनरेशन क्षमता
ChatGPT की नई इमेज जनरेशन तकनीक में बदलाव किया गया है। पहले DALL-E जैसे बाहरी मॉडल्स पर निर्भर रहने के बजाय, अब GPT-4o मॉडल में इमेज जनरेशन की क्षमता सीधे ChatGPT के साथ निहित है। OpenAI ने स्वीकार किया है कि यह नई प्रणाली पिछले मॉडल्स से कहीं अधिक जोखिम उत्पन्न कर सकती है।
OpenAI ने GPT-4o की इमेज जनरेशन प्रणाली के बारे में कहा, “यह पहले से अलग है क्योंकि यह एक ऑटोरेग्रैसिव मॉडल है, जबकि DALL-E एक डिफ्यूजन मॉडल था। इस परिवर्तन से नई क्षमताओं का जन्म हुआ है, जो पिछले मॉडल्स में नहीं थीं, और इससे कई नई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।”
हालांकि, ChatGPT की नई इमेज जनरेशन क्षमता के बावजूद, कंपनी ने बच्चों, एरोटिक कंटेंट और हिंसा, घृणा, या अपमानजनक सामग्री बनाने पर सख्त पाबंदी लगाई है।
विशेषज्ञों की राय
IDfy के चीफ बिजनेस ऑफिसर व्रिजु रे ने Mint से बातचीत में कहा, “Aadhaar की सत्यता अभी भी आसानी से जांची जा सकती है क्योंकि कार्ड की जानकारी और चेहरे के डेटा को बैक-एंड सिस्टम से मिलाया जा सकता है। हालांकि, PAN या ड्राइविंग लाइसेंस जैसी अन्य सरकारी पहचान पत्रों की सत्यता जांचना और भी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इनमें चेहरे की जानकारी नहीं होती। इसलिए, इन कार्ड्स में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की पहचान करना जरूरी है।”
दिल्ली स्थित पब्लिक पॉलिसी फर्म The Quantum Hub के संस्थापक साझेदार रोहित कुमार ने इस तकनीक के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “यह जरूरी है कि आउटपुट स्टेज पर मजबूत सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं, जैसे डिजिटल वॉटरमार्क्स और प्रॉविनेंस मेटाडेटा, ताकि जनरेट की गई सामग्री का दुरुपयोग रोका जा सके और संवेदनशील जानकारी का अनजाने में खुलासा न हो।”
कुमार ने चेतावनी दी, “यदि हमने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो इससे विश्वास की कमी हो सकती है, जिसका समाज और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।”