वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार रंजीत भट्टाचार्य का निधन
रायपुर, 14 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार रंजीत भट्टाचार्य का 13 फरवरी को उनके गृह नगर धमतरी में निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य और पत्रकारिता जगत में गहरा शोक व्याप्त है। वे लगभग पचास वर्षों से साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहे और अपनी सृजनशीलता, अनुशासन और सामाजिक प्रतिबद्धता के लिए विशेष रूप से पहचाने जाते थे।
रंजीत भट्टाचार्य ने जीवनकाल में ही नेत्रदान और देहदान का संकल्प लिया था। मरणोपरांत उनकी इस इच्छा का सम्मान करते हुए परिवारजनों ने पार्थिव शरीर रायपुर लाकर मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया। उनके इस निर्णय को साहित्यिक और सामाजिक जगत में एक प्रेरक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
वे जिला हिन्दी साहित्य समिति, धमतरी के पूर्व अध्यक्ष रह चुके थे। हिंदी की नई कविता और ग़ज़ल लेखन में उनके प्रयोगों ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई। उनकी अतुकांत कविताओं का संग्रह ‘पाँव बने हाथ’ वर्ष 1987 में प्रकाशित हुआ था, जिसे नई संवेदनाओं की अभिव्यक्ति के रूप में सराहा गया। कुछ वर्ष पूर्व प्रकाशित उनका ग़ज़ल संकलन ‘दुबला-पतला चाँद’ भी चर्चा में रहा। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ की पृष्ठभूमि पर आधारित उनका विज्ञान-उपन्यास ‘अबूझमाड़ का अतिथि’ भी प्रकाशित हो चुका है, जो उनकी रचनात्मक विविधता का प्रमाण है।
पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वर्ष 1977-78 में अपने मित्र रामबिलास अग्रवाल के साथ मिलकर उन्होंने धमतरी से साप्ताहिक ‘अपना मोर्चा’ का संपादन और प्रकाशन प्रारंभ किया। यह साप्ताहिक लगभग एक दशक तक प्रकाशित होता रहा और क्षेत्रीय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई।
धमतरी के दैनिक ‘प्रखर समाचार’ के कई दीपावली विशेषांकों के प्रकाशन में उन्होंने संपादन सहयोगी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही रायपुर से प्रकाशित दैनिक ‘हरिभूमि’ के धमतरी संस्करण में भी वे संपादन सहयोगी रहे। उनके साथ कार्य कर चुके पत्रकार उन्हें परिश्रमी, अनुशासनप्रिय और प्रेरक संपादक के रूप में याद करते हैं।
धमतरी जिला साहित्य समिति के अध्यक्ष डुमनलाल ध्रुव सहित समिति के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों, साथ ही धमतरी के पत्रकारों और प्रबुद्ध नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। समिति द्वारा आयोजित शोकसभा में साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके सुदीर्घ योगदान को स्मरण किया गया तथा उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला गया।
रंजीत भट्टाचार्य का जाना केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि एक ऐसी पीढ़ी की विदाई है जिसने शब्दों को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ा। साहित्य, पत्रकारिता और मानवीय मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
