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माओवाद एक विनाशकारी विचारधारा, देश को इससे मुक्त होना होगा: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने माओवाद को हिंसा को बढ़ावा देने वाली और देश के लिए घातक विचारधारा बताते हुए कहा कि भारत को इससे पूरी तरह मुक्ति दिलाना जरूरी है। रविवार (8 फरवरी 2026) को छत्तीसगढ़ के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि माओवाद न तो विकास की कमी से जुड़ा है और न ही यह केवल कानून-व्यवस्था की समस्या है।

गृह मंत्री ने माओवादियों से आत्मसमर्पण करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार मुख्यधारा में लौटने वालों का “रेड-कार्पेट स्वागत” करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कम्युनिस्ट विचारधारा समस्याओं का समाधान बंदूक में तलाशती है।
“जहां-जहां कम्युनिस्टों की सरकारें रहीं, वहां विकास नहीं हो पाया। कल्याण का वादा किया गया, लेकिन आदिवासियों के हाथों में हथियार थमा दिए गए। यह विचारधारा अंधकार और विनाश का प्रतीक है, जिससे देश को जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहिए,” उन्होंने कहा।

अमित शाह ने दावा किया कि लोकतांत्रिक राजनीति में कम्युनिस्ट दल अब सिमटते जा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में तिरुवनंतपुरम में भाजपा की मेयर जीत का जिक्र करते हुए कहा कि केरल में भी बदलाव की शुरुआत हो चुकी है।
“त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्टों का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है। केरल ही एकमात्र राज्य बचा है, लेकिन वहां भी जनता बदलाव का संकेत दे चुकी है,” उन्होंने कहा।

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उन्होंने राजनीति में विचारधारा की अहम भूमिका पर जोर देते हुए महात्मा गांधी के कथन का उल्लेख किया—“विचारधारा के बिना राजनीति पाप है।” गृह मंत्री ने कहा कि बिना स्पष्ट विचारधारा के कोई भी राजनीतिक दल न तो राज्य का और न ही देश का हित कर सकता है।

कार्यक्रम में उन्होंने वर्ष 2000 में भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ सहित तीन राज्यों के गठन और 2014 में यूपीए सरकार के दौरान आंध्र प्रदेश के विभाजन की तुलना भी की। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच आज भी चल रहे विवाद इस बात का प्रमाण हैं कि राज्य चलाना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि स्पष्ट और मजबूत विचारधारा की मांग करता है।