केंद्रीय बजट 2026–27 से पेंशनर निराश, पेंशन या डीआर को कर-मुक्त करने की मांग
रायपुर, 2 फरवरी 2026/ भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री और छत्तीसगढ़ प्रदेश पेंशनर्स महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव सहित संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने केंद्रीय बजट 2026–27 पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इस बजट से देशभर के करोड़ों पेंशनरों को आयकर में राहत की उम्मीद थी, लेकिन बजट में कोई ठोस घोषणा नहीं होने से पेंशनरों को निराशा हाथ लगी है।
संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन से आग्रह किया गया है कि संसद में बजट पर चर्चा के दौरान यदि संपूर्ण पेंशन राशि को आयकर से मुक्त करना संभव न हो, तो कम से कम बेसिक पेंशन पर मिलने वाली महँगाई राहत (डीआर) को ही आयकर से मुक्त करने की घोषणा की जाए।
महासंघ ने स्पष्ट किया कि पेंशन कोई अतिरिक्त आमदनी नहीं है, बल्कि जीवनभर की सरकारी सेवा के बाद मिलने वाली एकमात्र सामाजिक सुरक्षा है। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशनर इसी राशि से इलाज, दवाइयों और दैनिक आवश्यकताओं का खर्च वहन करता है। अनेक पेंशनरों को अपने आश्रित परिवार का खर्च भी इसी पेंशन से उठाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में पेंशन अथवा उस पर मिलने वाली महँगाई राहत पर आयकर लगाया जाना न्यायसंगत नहीं है।
महासंघ का कहना है कि यदि पेंशन या डीआर को कर-मुक्त किया जाता है, तो यह राशि सीधे घरेलू खर्चों में लगेगी। इससे पेंशनरों को वास्तविक राहत मिलेगी और साथ ही बाज़ार व अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
वीरेंद्र नामदेव ने अफसोस जताते हुए कहा कि एक फरवरी को प्रस्तुत आम बजट 2026–27 से देश के करोड़ों पेंशनरों और वरिष्ठ नागरिकों को ठोस राहत की उम्मीद थी, लेकिन बजट में आठवें वेतन आयोग, वरिष्ठ नागरिकों को रेल यात्रा में छूट, 65 वर्ष की आयु से अतिरिक्त पेंशन, परिवार पेंशनरों को 50 प्रतिशत पेंशन, तथा पेंशन कम्यूटेशन की अवधि में कमी जैसे वर्षों से लंबित मुद्दों पर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई। बजट की यह चुप्पी पेंशनरों के लिए अत्यंत निराशाजनक और असंवेदनशील है।
जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में महासंघ के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के प्रमुख प्रतिनिधियों ने एक स्वर में मांग की है कि संसद में बजट चर्चा के दौरान पेंशनरों के हितों को ध्यान में रखते हुए मानवीय, सहृदय और संवेदनशील निर्णय लिए जाएं तथा पेंशन अथवा महँगाई राहत की राशि को आयकर से मुक्त घोषित किया जाए।

