रायपुर में विश्वकर्मा समाज ने भगवान विश्वकर्मा प्रकटोत्सव धूमधाम से मनाया
रायपुर, 01 फरवरी 2026: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज विश्वकर्मा समाज द्वारा भगवान विश्वकर्मा प्रकटोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। सिविल लाइन स्थित वृंदावन हॉल में आयोजित इस समारोह में समाज के वरिष्ठ सदस्य, गणमान्य अतिथि और विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष आर.एस. विश्वकर्मा ने समाज के देश की प्रगति में योगदान और युवाओं को सशक्त बनाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज के विकास में शिक्षा और संस्कारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रायपुर के साहित्यकार और केंद्रीय हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य, कौशल विकास व उद्यमिता मंत्रालय के डॉ. माणिक विश्वकर्मा ने की। उन्होंने कहा कि शिक्षा और सही संस्कारों से समाज को मजबूत बनाया जा सकता है और आने वाली पीढ़ी में जिम्मेदार नागरिक तैयार किए जा सकते हैं।
विशेष अतिथियों में छत्तीसगढ़ लौह शिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष प्रफुल्ल विश्वकर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित योजनाओं के माध्यम से विश्वकर्मा समाज के विकास पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि समाज के सदस्यों को सरकार की योजनाओं का सही उपयोग करके आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनना चाहिए।
सांस्कृतिक पहलू पर ध्यान देते हुए, छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड के सलाहकार ललित शर्मा ने भगवान विश्वकर्मा द्वारा किए गए अलौकिक कार्यों का उल्लेख किया और कहा कि उनके अनुयायियों को उनके आदर्शों पर चलकर समाज की भलाई करनी चाहिए।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्टेयरिंग कमेटी, पीएम विश्वकर्मा, MSME मंत्रालय, भारत सरकार के सदस्य विश्वनाथन आचार्य तथा मिलन विश्वकर्मा भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा समाज के वरिष्ठ संरक्षक सीताराम विश्वकर्मा, अध्यक्ष पी.आर. विश्वकर्मा, सचिव किशनलाल विश्वकर्मा, कोषाध्यक्ष राजाराम विश्वकर्मा, प्रचार मंत्री मनोहर विश्वकर्मा, महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष शारदा पांचाल और अन्य पदाधिकारी व समाज के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
समारोह की शुरुआत भगवान विश्वकर्मा की पूजा- अर्चना और मंत्रोच्चारण से हुई। तत्पश्चात अतिथियों ने अपने विचार साझा किए। भजन-सत्संग और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां कार्यक्रम की मुख्य विशेषता रही। बच्चों और महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य और लोकगीत प्रस्तुत किए, जिससे दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने समाज की एकता और भाईचारे का संदेश साझा किया। इस अवसर पर परसराम विश्वकर्मा ने सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। समारोह के अंत में समाज के सदस्यों ने मिलकर भविष्य में शिक्षा, सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
यह कार्यक्रम न केवल भगवान विश्वकर्मा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम बना, बल्कि समाज में सांस्कृतिक जागरूकता, सेवा भाव और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का भी अवसर रहा।

