नवा रायपुर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17वीं बैठक, चार राज्यों के विकास और समन्वय पर 50 बिंदुओं पर चर्चा
रायपुर, 30 जनवरी 2026/ नवा रायपुर में आज मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17वीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें परिषद के सदस्य राज्यों छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में चारों राज्यों में सामाजिक-आर्थिक विकास, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित विषयों के निराकरण और आपसी समन्वय को मजबूत करने के लिए 50 बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
इस दौरान मध्य क्षेत्र के चारों राज्यों से जुड़े प्रशासनिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों के समाधान पर विचार-विमर्श किया गया तथा अंतर्राज्यीय सहयोग को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। बैठक में उपस्थित अधिकारी चारों राज्यों द्वारा अपनाई गई नवाचारी पहलों और बेस्ट प्रैक्टिसेस से भी रू-ब-रू हुए।
मुख्य बैठक से पहले एजेंडे को अंतिम रूप
मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसमें परिषद की मुख्य बैठक से पूर्व एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाता है। इस बैठक में लिए गए निर्णय और सिफारिशें परिषद की आगामी बैठक में प्रस्तुत की जाती हैं। साथ ही सदस्य राज्यों के लंबित अंतर्राज्यीय मामलों के समाधान, नीतिगत समन्वय को सुदृढ़ करने तथा विकास परियोजनाओं में आ रही व्यावहारिक समस्याओं के निराकरण पर भी चर्चा की गई।
वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति के अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील, केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्राज्यीय परिषद सचिवालय के सचिव आशीष श्रीवास्तव, अतिरिक्त सचिव शुभा ठाकुर, मध्यप्रदेश की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शामी, उत्तरप्रदेश के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा तथा उत्तराखंड के प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुंधाशु सहित केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और चारों राज्यों के संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि बैठक में चारों राज्यों और केंद्र सरकार के अधिकारियों के बीच विभिन्न विषयों पर रचनात्मक और उपयोगी चर्चा हुई है। निरंतर संवाद और अंतर्राज्यीय सहयोग के माध्यम से मध्य क्षेत्र के राज्यों के साझा हितों को प्रभावी रूप से सुनिश्चित किया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्राज्यीय परिषद सचिवालय के सचिव आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि बैठक में निकले निष्कर्षों के अनुरूप चारों राज्य तत्काल कार्यवाही प्रारंभ करें। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के विचार-विमर्श से केंद्र और राज्यों के बीच संवाद बेहतर होगा और साझा समस्याओं के समाधान के लिए ठोस तथा व्यावहारिक निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
इन मंत्रालयों और विभागों से जुड़े विषयों पर चर्चा
बैठक में केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय, आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, रेल मंत्रालय, खान मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, कोयला मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, जल जीवन मिशन, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, वित्त सेवा विभाग, डाक विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, वाणिज्य विभाग और मत्स्य पालन विभाग से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
चारों राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेस का प्रस्तुतिकरण
बैठक में अंतर्राज्यीय समन्वय, विकास और सुशासन के साथ-साथ चारों राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेस की प्रस्तुति भी की गई।
छत्तीसगढ़ द्वारा वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 का प्रस्तुतिकरण किया गया, जिसे जुलाई 2025 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा लॉन्च किया गया था। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म 16 विभागों की 136 से अधिक सेवाओं को एकीकृत करता है, जिससे औद्योगिक निवेश, भूमि प्रबंधन, पर्यावरणीय स्वीकृति और सब्सिडी प्रक्रियाओं में तेजी आई है। इसके साथ ही दंतेवाड़ा मॉडल के तहत ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षित भूमि अभिलेख प्रणाली और एआई आधारित विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) को शिक्षा क्षेत्र में अभिनव पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
मध्यप्रदेश ने ग्रामीण पर्यटन विकास को अपनी प्रमुख बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में प्रस्तुत किया। इसके अंतर्गत 125 गांवों में होम-स्टे और स्थानीय संस्कृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही ऊर्जा बचत एवं नवीकरणीय ऊर्जा नीति-2025 के माध्यम से वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करने के लक्ष्य और पीएम श्री टूरिज्म हेली सर्विस की जानकारी दी गई।
उत्तराखंड ने किसान-से-आईटीबीपी आपूर्ति श्रृंखला योजना के जरिए सीमावर्ती किसानों की आय वृद्धि, डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम से प्लास्टिक कचरा प्रबंधन तथा स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (SARA) के माध्यम से जल स्रोतों के पुनर्जीवन की पहलों का प्रस्तुतीकरण किया। उत्तरप्रदेश के अधिकारियों ने शहरी आवास सुधार, श्रम न्याय सेतु पोर्टल और सेवा मित्र जैसी नवाचारी पहलों की जानकारी साझा की।
