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अजित पवार विमान हादसा: 28 दिन की चूक और जानलेवा तकनीकी कमी?

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को ले जा रहा चार्टर्ड विमान हादसे का शिकार हो गया, जिससे विमानन सुरक्षा नियमों और तकनीकी खामियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह विमान भारत की सैटेलाइट आधारित लैंडिंग सुरक्षा प्रणाली गगन (GAGAN) से सिर्फ 28 दिन पहले के रजिस्ट्रेशन के कारण वंचित रह गया था।

बुधवार सुबह पुणे जिले के बारामती एयरपोर्ट पर खराब दृश्यता के बीच लैंडिंग की कोशिश के दौरान विमान रनवे से करीब 100 मीटर पहले दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में 66 वर्षीय अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई। विमान में आग लग गई और कोई भी यात्री बच नहीं सका।

नियमों के दायरे में, लेकिन तकनीक से पीछे

दुर्घटनाग्रस्त 16 साल पुराना लियरजेट विमान 2 जून 2021 को भारत में पंजीकृत हुआ था। इसके ठीक 28 दिन बाद एक नया नियम लागू हुआ, जिसके तहत सभी नए रजिस्टर होने वाले विमानों में सैटेलाइट आधारित नेविगेशन और अप्रोच सिस्टम अनिवार्य कर दिया गया।

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चूंकि यह विमान नियम लागू होने से पहले पंजीकृत था, इसलिए उस पर गगन सिस्टम लगाना कानूनी रूप से जरूरी नहीं था। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इसी वजह से यह विमान खराब मौसम में अतिरिक्त तकनीकी सहायता से वंचित रहा।

छोटे एयरपोर्ट और सीमित सुविधाएं

बारामती एयरपोर्ट एक अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड है, जहां पूर्णकालिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल की व्यवस्था नहीं होती। यहां न तो इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) मौजूद है और न ही उन्नत ग्राउंड-आधारित गाइडेंस।

ऐसे एयरपोर्ट पर पायलटों को पारंपरिक “स्टेप-डाउन” पद्धति से उतरना पड़ता है, जिसमें हर चरण पर रनवे को आंखों से देखना जरूरी होता है। खराब मौसम या कोहरे में यह प्रक्रिया बेहद जोखिम भरी हो जाती है।

गगन सिस्टम क्यों है अहम

भारत द्वारा विकसित गगन प्रणाली सैटेलाइट की मदद से पायलटों को सटीक लैंडिंग मार्ग दिखाती है, खासकर उन हवाई अड्डों पर जहां ILS उपलब्ध नहीं होता। लेकिन इसके लिए विमान में विशेष एवियोनिक्स उपकरण लगे होना जरूरी होता है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह विमान गगन-संगत तकनीक से लैस होता, तो कम दृश्यता में भी पायलटों को बेहतर मार्गदर्शन मिल सकता था।

हादसे के आखिरी पल

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, विमान ने सुबह 8:18 बजे पुणे अप्रोच से रिलीज होने के बाद बारामती एयरपोर्ट से संपर्क किया। पायलटों को बताया गया कि दृश्यता करीब 3,000 मीटर है और हवाएं शांत हैं।

पहली लैंडिंग कोशिश में रनवे दिखाई न देने पर पायलटों ने गो-अराउंड किया। दूसरी बार भी उन्हें रनवे देखने में दिक्कत हुई। कुछ सेकंड बाद “रनवे इन साइट” की सूचना दी गई और 8:43 बजे लैंडिंग की अनुमति मिली।

ठीक एक मिनट बाद, 8:44 बजे रनवे के पास आग की लपटें दिखाई दीं। विमान का मलबा रनवे के बाईं ओर पाया गया।

राजनीतिक और प्रशासनिक असर

अजित पवार की अचानक मृत्यु से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई है। भाजपा नेतृत्व वाली सरकार सदमे में है, वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता गहरा गई है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने इस हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना बताते हुए इसे राजनीतिक रंग न देने की अपील की है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या तकनीकी सीमाएं, मौसम की स्थिति और ऑपरेशनल फैसलों का यह घातक संयोजन हादसे की वजह बना।