स्वतंत्रता आंदोलन म छत्तीसगढ़ के सेनानी

(पूर्व आई.एस.एस.)
भारत देश मं देश के खातिर प्रान देवईया मन के कमी नई रहिस। आठवीं शताब्दी से देश ह गुलामी के दुःख ल सहत रहिस। ग्यारह सौ साल गुलाम रहे के बाद उन्नीसवीं शताब्दी के नवजागरण आंदोलन के कारण पूरा देश म अंग्रेज मन के खिलाफ आंदोलन होए लगिस। एखर प्रभाव छत्तीसगढ़ मं घलो दिखाई देए लगिस। 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन के पहिले ही छत्तीसगढ़ मं अंग्रेज मन खिलाफ बिरोध होए लगे रहिसे। 1854 तक पूरा छत्तीसगढ़ ह अंग्रेज मन के कब्जा मं आगे रहिसे।
अंग्रेज मन के बनाए जंगल कानून के आदिवासी मन भारी बिरोध करिन। काबर के जल, जंगल, जमीन, आदिवासी मन के पुरखौती आय, ओमा अंग्रेज मन कब्जा करे लगिन। जेखर कारन सोनखान, उदयपुर, सोहागपुर अऊ संभलपुर रियासत मं अंग्रेज मन के बिरोध मं होए लगिस। सोनखान रियासत ल अंग्रेज मन अपन कब्जा मं कर लिन, तब जमींदार राम साय ह ऐखर बहुत बिरोध करिस। रामसाय के बेटा बीरनारायण सिंग बिझवार घलो ह अंग्रेज मन के बिरोध मं बगावत ल तेज करिस। नरायण सिंग ह छत्तीसगढ़ के पहिली स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आय। 1857 के पहिली स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आय। 1857 के पहिली स्वतंत्रता संग्राम के बेरा मं ओहर अंग्रेज मन के जेल ले भाग गे अउ अंग्रेजी सेना ले खूब लड़ाई लड़िस फेर बाद म ओला षंडत्रयंत्र पूर्वक पकड़ के ले गईस। 10 दिसंबर 1857 के ओला रायपुर के बीच चउक म फांसी दे दिए गईस। जेन ल आज हमन जयस्तंभ चउक के नाम ले जानथन।
रायगढ़ के गोड़ राजा देवनाथ सिंह ह अंग्रेज मन के साथ मिल के विश्वासघात करिस। ऐला हमन छत्तीसगढ़ के पहिली जयचंद कहि सकथन। जेखर कारन उदयपुर जमींदारी के जमींदार शिवराजसिंह अंग्रेज मन से हारगे अऊ उदयपुर के बीर सेनापति कल्याण सिंग अऊ धीरज सिंग अंग्रेज मन के बिरूद्ध लड़त लड़त बीर गति ल पाइन।
आंदोलन मं रायपुर ले रविशंकर सुकुल, असगर अली बिलासपुर ले वजीर खान, अकबर खान हाफिज खान मन बढ़ चढ़ के भाग लेईन। 20 दिसम्बर 1920 मं महात्मा गांधी ह पहिली बार छत्तीसगढ़ आईस, जेखर कारन छत्तीसगढ़ के जतका स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहिन ओमा नवा उत्साह अऊ जोस आईस।
नागपुर 1920 मं कांग्रेस के अधिवेसन हाईस जेमा छत्तीसगढ़ के बहूत झान मन भाग लेईन अऊ छत्तीसगढ़ कं आके बहिस्कार आंदोलन ल चलाइन जेखर कारन बिंदसी समान,सरकारी सेवा उपाधी के बहिस्कार अदालत, वकालत अऊ चुनाव के बहिस्कार शुस् होगे। बिलासपुर मं ई.राघवेन्द्र राव, यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्तव, बैरिस्टर छेदीलाल, रायपुर मं सुंदर लाल शर्मा, रविशंकर सुकुल, ठा. प्यारेलाल सिंग, सखाराम दुबे, बामन राव लाखे, धमतरी से बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव, नरायन दीक्षित, दुर्ग से घनश्याम सिंह गुप्त अऊ रत्नाकर झा मन ए आंदोलन मं बढ़ चढ के भाग लेइन।
मई सन् 1921 मं बिलासपुर के शनीचरी पड़ाव मं एक बहुत बड़े सभा होइस जेमा माखन लाल चतुर्वेदी जी ह बड़ा ओजस्वी भाषन देए रहिस। जेखर कारन 12 मई 1921 मं राजद्रोह के आरोप लगाके ‘‘एक भारतीय आत्मा‘‘ के नाम से परसिद्ध राष्ट्रवादी कवि पं. माखन लाल चतुर्वेदी ल जबलपुर मं गिरफतार करके बिलासपुर के सेन्ट्रल मं बंद कर दिए गइस। बिलासपुर के जेल मं रहते रहत माखन लाल चतुर्वेदी जी ह राष्ट्र भक्ति से भरे कविता ‘‘पुष्प की अभिलाषा’’ लिखिस जेन ह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन मं जोस भर दिस।
![]()
1930 मं सविनय आंदोलन जम्मो भारत देश मं शुरू होगे। छत्तीसगढ़ मं पाच पांडव कहे जाने वाले वामन राव लाखे, महंत लक्ष्मीनारायण दास, ठा. प्यारेलाल सिंग, मौलान अब्दुल रऊफ अऊ शिवदास डागा जीम न ए आंदोलन के अगुवाई करिन। एखरे बाद जंगल कानून के बिरोध मं जंगल सत्याग्रह शुस् होईस जेमा बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव, शोभाराम देवांगन, गिरधारी लाल तिवारी, नारायन राव, डॉ. खूबचंद बघेल, मेघा वाले अऊ फिरतू राम गोड़ यति यतन लाल मन बढ़-चढ़ के भाग लिन।
एही समय रायपुर के तीसरी बटालियन के सिपाही हनुमान सिंग घलो ह अंग्रेज मन के बिरोध मं उठ खडे़ होइस अऊ अंग्रेज मेजी सेडवेल ल मार के तोपखाना मं अपन संगी मन संग मिल के कब्जा कर लिस। ए बाज ह 1856 मं होइस।
हनुमान सिंग ल बहुत कोसीस करेके बाद भी अंग्रेज मन ओला नई पकड़ पाईन। हनुमान सिंग ल छत्तीसगढ़ के मंगल पांडे कहे जाथे।
28 दिसंबर 1885 मं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के स्थापना होए के बाद ले छत्तीसगढ़ चलो मं हलचल होए लागिस। छत्तीसगढ़ के रामदयाल तिवारी, वामन राव लाखे, माधवराव सप्रे, सी.एम. ठक्कर, बद्रीप्रसाद साव, पंड़ित रविशंकर शुक्ल मन कांग्रेस के बम्बई, नागपुर अऊ बनारस अधिवेशन मं भाग ले के छत्तीसगढ़ मं आजादी के बिगुल बजाईन।
सूरत अधिवेशन में कांग्रेस मं दू गुट बनगे। नरमदल, गरमदल। एखर असर छत्तीसगढ़ मं घलो परिस। नरम दल मं पं. सुंदर लाल शर्मा, देवेन्द्र नाथ चौधरी, डॉ. हरि सिंग गौर, श्री केलकर अऊ डॉं. शिवराम भुंजे तथा गरम दल म दादा भाई खोपडे़र्, पं. रविशंकर सुकुल, बैरिस्टर छेदीलाल,माधवराव सप्रे, ई. राघवेन्द्र, लक्ष्मण राव, ठाकुर हनुमान सिंग अऊ वामनराव लाखे सहित बहुत लोगन मान ऐसा साथ रहिन।
‘‘हिन्द केसरी’’ समाचार पत्र मे माधवराव सप्रे के एक लेख छपिस जेकर कारन अंग्रेज मन ओला 1908 म पकड़ लिहिन। ऐखर बाद भी सप्रे जी स्वतंत्रता आंदोलन से जुडे़ रहिन। बाल गंगाधर तिलक के प्रभाव मं छत्तीसगढ़ घलो मं 1917 सन् मं होम रूल के छत्तीसगढ़ मं ऐखर साखा खुलिस जेन मं रायपुर ले पं. रविशंकर सुकुल, बिलासपुर ले ई. राघवेन्द्र राव, दुरूग ले घनश्याम गुप्त अऊ रायगढ़ ले ठाकुर प्यारे लाल सिंग मन एखर अगुवाई करिन।
सन् 1919 मं रोलेट एक्ट बनिस। एखर बिरोध मं 30 मार्च 1919 के दिन छत्तीसगढ़ मं काला दिवस मानए गईस। बिलासपुर में बैरिस्टर छेदीलाल, ई.राघवेन्द्र राव, यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्तव, रायपुर मं रविशंकर सुकुल, माधव राव सप्रे, महंत लक्ष्मीनारायण दास, रतनपुर ले पुरूषोतम दास मन हड़ताल करिन, बड़े-बडे़ सभा करके जनता मं अलख जगाइन।
ऐही बीच मं 1932 सन् मं रायपुर मं बानर सेना गठित होईस जेखर काम रहाए अंग्रेज मन के बिरोध म लगातार प्रदर्शन करना, जेखर कारन अंग्रेज मन हलकान होगे।
1942 मं अंग्रेजों भारत छोड़ो के नारा बुलंद होए लगिस। छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्वत, कालीचरण सुकुल, राजकिशोर वर्मा, भगवती चरन सुकुल, बैरिस्टर छेदीलाल अऊ कमल नरायण शर्मा मन भारत छोड़ो आंदोलन म महत्वपूर्ण भूमिका निभाईन। अंग्रेज मन आंदोलन से हलाकान होके इनला पकड़ करके जेल मं डार दीस। लेकिन ए आंदोलन ह अऊ तेज होगे। 26 जनवरी 1946 मं पूरा भारत देश मं स्वाधीनता दिवस के आयोजन होईस।
प्रभात फेरी अऊ झंडा वंदन के कार्यक्रम जोर-सोर से होए लगिस। आखिर मं अंग्रेज मन थक-हार के देस ल छोड़े के मन बना लीन अऊ भारत देश ह 15 अगस्त 1947 मं आजाद होगे। ऐ तरह से हम देखथन के देस के स्वतंत्रता आंदोलन मं छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन के बहुत बड़े हाथ रहिसे।
रमेश चन्द्र श्रीवास्तव
(पूर्व आई.एस.एस.)
सागा ले आउट कॉलोनी आकाश मार्ग, शुभम विहार,
बिलासपुर, (छ0ग0) पिन नं. 495001
मोबाईल नं. – 9827151437, 9425222486
Email. – rcsbsp85@gmail.com
