जनसंपर्क अधिकारियों की राज्य स्तरीय कार्यशाला संपन्न, रणनीतिक संचार और एआई उपयोग पर हुआ गहन मंथन
रायपुर, 13 जनवरी 2026। बदलते मीडिया परिदृश्य में प्रभावी, विश्वसनीय और समयबद्ध संचार आज जनसंपर्क की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। इसी दृष्टि से आयोजित जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों की दो दिवसीय राज्य स्तरीय कौशल संवर्धन कार्यशाला के दूसरे दिन रणनीतिक संचार, प्रशासनिक भूमिका और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के व्यावहारिक उपयोग पर व्यापक एवं गहन मंथन किया गया। कार्यशाला में अधिकारियों ने प्रशिक्षण देने आए विशेषज्ञों से सवाल-जवाब के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं और शंकाओं का समाधान किया। जनसंपर्क विभाग के सभी जिला कार्यालयों में पदस्थ अधिकारी तथा संचालनालय के अधिकारी इस कार्यशाला में शामिल हुए।
कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मीडिया सलाहकार पंकज झा ने जनसंपर्क अधिकारियों के मीडिया से प्रगाढ़ और भरोसेमंद संबंध स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी और समयानुकूल बताते हुए उम्मीद जताई कि यह व्यावहारिक प्रशिक्षण अधिकारियों की पेशेवर दक्षता को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों और टूल्स के माध्यम से जनसंपर्क के दायित्वों का अधिक प्रभावी ढंग से निर्वहन किया जा सकेगा। उन्होंने अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित करने का सुझाव भी दिया।
कार्यशाला के दूसरे दिन के पहले सत्र में आज की जनधारा समाचार पत्र के संपादक तथा जनसंपर्क विभाग के सेवानिवृत्त अपर संचालक सुभाष मिश्रा ने RACE फार्मूला के माध्यम से जनसंपर्क में उभरते रुझानों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शोध (Research), कार्य (Action), संचार (Communication) और मूल्यांकन (Evaluation) के जरिए प्रभावी जनसंपर्क के व्यावहारिक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि प्रभावी जनसंपर्क केवल सूचना प्रसारण नहीं, बल्कि शोध आधारित योजना, सुविचारित क्रियान्वयन, स्पष्ट संवाद और निरंतर मूल्यांकन की समग्र प्रक्रिया है। इस मॉडल के माध्यम से जनसंपर्क को अधिक परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है।
दूसरे सत्र में समाचार पच्चीसा के संपादक तथा छत्तीसगढ़ साहित्य परिषद के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने “जनसंपर्क की चुनौतियाँ” विषय पर विचार रखते हुए मीडिया की बदलती कार्यशैली, डिजिटल माध्यमों की बढ़ती भूमिका, फेक न्यूज तथा त्वरित और तथ्यपरक प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क अधिकारियों को मीडिया संस्थानों की अपेक्षाओं को समझते हुए संतुलित, विश्वसनीय और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
तीसरे सत्र में भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं लेखक सुशील त्रिवेदी ने जनसंपर्क अधिकारी के गुणों और प्रशासन में उनकी भूमिका पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क अधिकारी शासन और जनता के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी होते हैं। उनकी भूमिका केवल सूचना देने तक सीमित नहीं, बल्कि जनभावनाओं को समझकर उन्हें प्रशासन तक प्रभावी रूप से पहुँचाने की भी है।
कार्यशाला के अंतिम सत्र में वरिष्ठ पत्रकार जोसेफ जॉन ने जनसंपर्क विभाग के कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के प्रभावी उपयोग की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने एआई टूल्स से बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए स्पष्ट प्रॉम्प्ट देने की तकनीक, जीरो-शॉट से लेकर चेन-ऑफ-थॉट तक विभिन्न प्रकार के प्रॉम्प्ट्स, बेसिक प्रॉम्प्ट से कॉन्टेक्स्ट इंजीनियरिंग, एआई हैलुसिनेशन (गलत आउटपुट) की पहचान तथा ह्यूमन-इन-द-लूप की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला। उन्होंने एआई टूल्स के माध्यम से त्वरित अनुसंधान, कंटेंट रीपरपजिंग, तथ्य-जांच, विचार-मंथन और जनसंपर्क विभाग के दैनिक कार्यों को अधिक सरल, तेज और प्रभावी बनाने के तरीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया।
कार्यशाला में अपर संचालक जवाहरलाल दरियो, उमेश मिश्रा, संजीव तिवारी, आलोक देव, हर्षा पौराणिक, संतोष मौर्य सहित संचालनालय एवं जिलों में पदस्थ अधिकारी उपस्थित थे।
