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‘35 मिलियन मौतें होतीं’ – ट्रंप ने पाक प्रधानमंत्री का हवाला दिया

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर यह दावा दोहराया है कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में आठ बड़े युद्धों को रुकवाया, जिनमें भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित सैन्य टकराव भी शामिल था। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच गंभीर युद्ध छिड़ सकता था।

अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “हम देश और दुनिया में शांति और सुरक्षा बहाल कर रहे हैं। अपने पहले दस महीनों में मैंने आठ युद्ध समाप्त कराए। भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति बेहद गंभीर थी, यह परमाणु युद्ध में बदल सकती थी।”

ट्रंप ने दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने उनसे कहा था कि यदि उस समय संघर्ष नहीं रोका जाता तो लगभग 3.5 करोड़ लोगों की जान जा सकती थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका प्रशासन “नौवें युद्ध” को खत्म करने की दिशा में काम कर रहा है, जो रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष है। ट्रंप के मुताबिक, “अगर मैं राष्ट्रपति होता तो यह युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता।”

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भारत-पाक तनाव पर दावा

राष्ट्रपति ट्रंप इससे पहले भी कई बार यह कह चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव को रोका। उन्होंने मई 2025 में सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि अमेरिका की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों ने “पूर्ण और तत्काल” युद्धविराम पर सहमति जताई। उन्होंने यह भी दावा किया था कि यदि दोनों देश पीछे नहीं हटते तो अमेरिका 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा था।

हालांकि भारत ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है। नई दिल्ली का कहना है कि मई 2025 में शत्रुता समाप्त करने का निर्णय दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच सीधे संवाद के बाद हुआ था, इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी।

ऑपरेशन सिंदूर और पृष्ठभूमि

भारत ने 7 मई 2025 को “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया था, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हो गई थी।

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अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में एक द्वितीय विश्व युद्ध के पूर्व सैनिक को भी सम्मानित किया। भाषण के अंत में उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “मैं हमेशा से ‘कांग्रेसनल मेडल ऑफ ऑनर’ पाना चाहता था, लेकिन मुझे बताया गया कि मैं खुद को यह सम्मान नहीं दे सकता।”

राष्ट्रपति ट्रंप के दावों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है, जबकि भारत की ओर से स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े निर्णय स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं और किसी बाहरी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया गया था।