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मुक्तिबोध हिन्दी के सर्वाधिक चर्चित रचनाकार: डाॅ. रमन सिंह

मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने आज जिला मुख्यालय राजनांदगांव में हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय गजानन माधव मुक्तिबोध की 50वीं पुण्य तिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा- मुक्तिबोध समकालीन हिन्दी साहित्य के सर्वाधिक चर्चित रचनाकार थे, जिन्होंने मानवता के कल्याण के लिए साहित्य साधना में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। हम सबके लिए यह गर्व की बात है कि राजनांदगांव को मुक्तिबोध जैसे राष्ट्रीय स्तर के रचनाकार की कर्मभूमि होने का गौरव मिला है। मुख्यमंत्री ने शहर के दिग्विजय महाविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में मुक्तिबोध पर केन्द्रित डाॅ. राजेन्द्र मिश्र की पुस्तक ‘छत्तीसगढ़ में मुक्तिबोध’ का विमोचन भी किया।

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बड़ी संख्या में मौजूद साहित्यकारों और प्रबुद्ध नागरिकों को सम्बोधित करते हुए डाॅ. रमन सिंह ने कहा- राजनांदगांव स्वर्गीय डाॅ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और स्वर्गीय डाॅ. बलदेव प्रसाद मिश्र जैसे साहित्य मनिषियों की भी कर्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध है। इसी कड़ी में मुक्तिबोध जी ने भी ग्यारह वर्षो तक यहां साहित्य साधना करके इस शहर के साथ पूरे छत्तीसगढ़ का नाम रौशन किया है। उनमें गजब की साहित्यिक प्रतिभा थी, लेकिन वे बेहद संकोची स्वभाव के थे। उनकी अधिकांश कालजयी रचनाओं का प्रकाशन उनके निधन के बाद हुआ। डाॅ. रमन सिंह ने कार्यक्रम में बताया कि मुक्तिबोध पर केन्द्रित एक महत्वपूर्ण आयोजन जनवरी 2015 में राजनांदगांव के त्रिवेणी परिसर में किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि संग्रहालय के रूप में राज्य शासन द्वारा यह परिसर स्वर्गीय श्री मुक्तिबोध, डाॅ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और डाॅ. बलदेव प्रसाद मिश्र की स्मृति में विकसित किया गया है।

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कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री अजय चन्द्राकर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। श्री चन्द्राकर ने कहा कि मुक्तिबोध भारतीय साहित्य में इस शताब्दी के सबसे प्रमुख हस्ताक्षर थे। छत्तीसगढ़ साहित्यिक दृष्टि से भी एक समृद्ध प्रदेश है। स्वागत भाषण संस्कृति विभाग के संचालक श्री राकेश चतुर्वेदी ने दिया। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में स्वास्थ्य और नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अमर अग्रवाल, लोक निर्माण मंत्री तथा जिले के प्रभारी श्री राजेश मूणत, लोकसभा सांसद श्री अभिषेक सिंह और श्री विनोद कुमार शुक्ल तथा डाॅ. राजेन्द्र मिश्र सहित अनेक साहित्यकार, प्रबुद्ध नागरिक और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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