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जल संसाधन विभाग के पांच सहायक अभियंता और चार उप अभियंता निलंबित

रायपुर, 23 जून 2014/ राज्य सरकार ने मिनीमाता बांगों परियोजना जल संसाधन बिलासपुर के अंतर्गत परियोजना संभाग बिलासपुर में नहरों के ईआरएम (एक्सटेंशन, रिनोवेशन और मार्डनाईजेशन) कार्य में प्रथम दृष्टि में शासकीय नियमों के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर पांच सहायक अभियंताओं और चार उप अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन की यह कार्रवाई जल संसाधन विभाग के सचिव गणेश शंकर मिश्रा द्वारा की गई है। मिश्रा ने आज यहां बताया कि उन्होंने जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता एच. आर. कुटारे तथा मुख्यालय के उड़नदस्ते के साथ इस परियोजना की अकलतरा शाखा नहर, चांपा शाखा नहर, केरा वितरक नहर तथा केरा माईनर में ईएमआर मद से चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों का इस महीने की बारह तारीख को आकस्मिक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कार्यों में अनियमितता मिलने और गुणवत्ता विहीन कार्यों की वजह से तथा शासकीय नियमों के उल्लंघन के कारण संबंधित अभियंताओं के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है। निलंबित सहायक अभियंताओं में पी.डी. खलखो, ए. टोप्पो, एस. मिंज, मालिक राम साहू, डी.एस. कुंजाम और निलंबित उप अभियंताओं में एम. आर. सोनी, बी.एन. उपाध्याय, एम.एल. गुलावानी तथा आर.आर. देवांगन शामिल हैं। इन अधिकारियों के दो अलग-अलग निलंबन आदेश आज देर शाम यहां नया रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) से जल संसाधन विभाग द्वारा जारी कर दिए गए हैं।
डोंगा-कहरौद उप शाखा नहर, घिवरा माईनर एवं केरा वितरक नहर में ईएमआर के अंतर्गत कराए जा रहे लाईनिंग कार्यों में अनियमितता बरती जाने के कारण कार्य विभाग नियमावली के परिशिष्ट 1.26 एवं 1.28 तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम-1965 के नियम 3 का उल्लंघन करने का प्रथम दृष्टि दोषी पाए जाने पर पी.डी. खलखो, अनुविभागीय अधिकारी अकलतरा शाखा नहर, उप संभाग क्रमांक-8 लोहर्सी तथा अगस्टीन टोप्पो, अनुविभागीय अधिकारी जांजगीर शाखा नहर, जल प्रबंध उप संभाग क्रमांक-3 बिर्रा तथा तत्कालीन उप अभियंता सिलवेस्तर मिंज (वर्तमान अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन उप संभाग राजपुर सरगुजा), मालिक राम साहू (वर्तमान अनुविभागीय अधिकारी उप संभाग बलरामपुर),  डी.एस. कुंजाम (वर्तमान अनुविभागीय अधिकारी पैरी उच्च बांध उप संभाग रूद्री) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनका मुख्यालय कार्यालय मुख्य अभियंता हसदेव गंगाकछार अंबिकापुर निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार हसदेव नहर जल प्रबंध संभाग जांजगीर के अंतर्गत ईआरएम के तहत कराए जा रहे नहरों के लाईनिंग कार्यो में पाए गए गुणवत्ता विहीन कार्य के लिए प्रथम दृष्टि दोषी पाए जाने के फलस्वरूप मुख्य अभियंता मिनीमाता (हसदेव) बांगों परियोजना जल संसाधन विभाग बिलासपुर की अनुशंसा के अनुसार छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-9 (1) (क) के अंतर्गत उपअभियंता एम.आर. सोनी, बी.एन. उपाध्याय, एम.एल. गुलावानी तथा आर.आर. देवांगन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है तथा उनका मुख्यालय कार्यालय अधीक्षण अभियंता श्याम बरनई परियोजना मंडल अंबिकापुर निर्धारित किया गया है।
जल संसाधन सचिव मिश्रा ने बताया कि इन प्रकरणों में निरीक्षण के दौरान कार्य स्थल पर उपस्थित ठेकेदारों से स्वीकृत कार्यों के संबंध में पूछताछ की और कार्य स्थल पर ही मेजरमेंट बुक (माप पुस्तिका) में संबंधित उप अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों द्वारा की गई प्रविष्टियों और स्थल पर किए गए कार्यों का सत्यापन किया गया। उड़नदस्ते के अधिकारियों द्वारा उपरोक्त कार्यों की जांच की गई। अधिकारियों ने हथौड़े से मारकर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांची । निर्माण कार्यों में गंभीर अनियमितता तथा फर्जी कार्यों की प्रविष्टि माप पुस्तिका में करने संबंधी तथ्य मिले। सचिव मिश्रा ने यह भी बताया कि अकलतरा शाखा नहर के अंतर्गत डोंगा कहरौद उप शाखा नहर की मरम्मत, सुधार एवं क्षतिग्रस्त लाईनिंग के लिए दो करोड़ 75 लाख रूपए की स्वीकृति दी गई थी। उन्होंने इस कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि क्षतिग्रस्त लाईनिंग के सुधार कार्य में एलडीपीई फिल्म का उपयोग नहीं किया गया और स्लीपर भी नहीं बनाया गया। निरीक्षण में नियमानुसार निर्धारित मानक एवं गुणवत्ता के लाईनिंग कार्य करना नहीं पाया गया। लाईनिंग कार्य को तोड़कर देखने पर पाया गया कि क्षतिग्रस्त लाईनिंग के हिस्से के ऊपर मात्र प्लास्टर कर नया कार्य करना बताया गया है। क्षतिग्रस्त हिस्से को न तो डिसमेंटल किया गया और न ही सबग्रेड बनाया गया। प्लास्टर करके लाईनिंग कार्य करना बताया गया तथा राज्य शासन द्वारा स्वीकृत राशि से फर्जी कार्य कर शासन को आर्थिंक क्षति पहुंचाई गई। इसी प्रकार चांपा शाखा नहर की हसौद वितरक नहर के अंतर्गत सीमेंट कांक्रीट लाईनिंग के निरीक्षण में पाया गया कि वहां पर किए गए कार्य में क्यूरिंग बिलकुल नहीं कराई गई है, जिससे कांक्रीट भुरभुरी होकर टूट रही है। इसी प्रकार केरा वितरक नहर और केरा माईनर में अनेक स्थानों पर लगाई गई पुरानी लैग स्टोन लाईनिंग (क्षतिग्रस्त) को हटाया नहीं गया है तथा उसके ऊपर ही प्लास्टर करके इसे नया कार्य करना बताया गया। इन कार्यों में सबग्रेड तथा एलडीपीई फिल्म भी डाली नहीं गई है।
जल संसाधन सचिव मिश्रा ने बताया कि उन्होंने मौके पर उपस्थित ठेकेदारों से जानकारी ली। ठेकेदारों से  कोई संतोषजनक कारण और स्पष्टीकरण नहीं मिल पाया। सचिव गणेश शंकर मिश्रा ने बताया कि इस संभाग के निर्माण कार्यों के पर्यवेक्षण में लापरवाही और उदासीनता बरतने के आरोप में कार्यपालन अभियंता ए.के. श्रीवास्तव, अधीक्षण अभीयंता कोरबा एस.के. पाठक एवं मुख्य अभियंता ए.के. दुबे और असिस्टेंट रिसर्च आफिसर (एआरओ) मिथलेश शुक्ला एवं नवाज खान को कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया है। मिश्रा ने बताया कि विभाग द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में कमी पाए जाने के कारण यह बड़ी कार्रवाई की गई है। इससे पहले राजनांदगांव जिले में चल रहे निर्माण कार्यों के निरीक्षण के दौरान गुणवत्ता विहीन कार्य पाए जाने पर संबंधित कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी तथा तीन उप अभियंताओं के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। इसी प्रकार बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के पलारी के पास लाईनिंग कार्य में अनियमितता तथा घटिया निर्माण कार्य कराए जाने के कारण तीन उप अभियंताओं को निलंबित किया जा चुका है।
मिश्रा ने बताया कि मिनीमाता बांगों परियोजना के बिलासपुर परियोजना संभाग के जांजगीर क्षेत्र की जल उपभोक्ता संस्थाओं के पदाधिकारियों द्वारा लम्बे समय से शिकायत कर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की जा रही थी। इन कार्यों के ठेकेदारों की सांठ-गांठ से गुणवत्ता विहीन और फर्जी कार्य कराए जाने की शिकायत मिली थी। मिश्रा ने बताया कि संबंधित ठेकेदारों अच्छेलाल अग्रवाल और विष्णु शर्मा के खिलाफ राज्य शासन से अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार नियमानुसार कड़ी कार्रवाई शासन द्वारा की जा रही है। भविष्य में इन ठेकेदारों को विभाग के कार्यों से अलग करने के साथ-साथ इनके नाम काली सूची में डालने की कार्रवाई की जा रही है। मिश्रा ने बताया कि स्तरहीन कार्यों को पूरी तरह तोड़कर ठेकेदारों से उनके व्यय पर नये सिरे से कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं। ठेकेदारों को उनके द्वारा पूर्व में कराए गए कार्यों का भुगतान रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

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