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RSS प्रमुख मोहन भागवत का विजयादशमी संबोधन: “भारत के पुनर्जागरण” का खाका, आतंकवाद से लेकर आर्थिक असमानता तक पर चिंता

मोहन भागवत का यह संबोधन न केवल संघ के भविष्य की दिशा तय करता है, बल्कि वर्तमान राष्ट्रीय और वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका पर भी गंभीर विमर्श प्रस्तुत करता है। उनका फोकस केवल चुनौतियों को चिन्हित करने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने समाधान की ओर भी स्पष्ट इशारा किया — “आत्मनिरीक्षण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता।”

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