छत्तीसगढ़ की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत : परंपराएँ, लोककला और लोकजीवन
छत्तीसगढ़ की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में लोकपरंपराएँ, लोकनृत्य, लोककला और जनजातीय जीवन प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान का सशक्त आधार प्रस्तुत करते हैं।
Read Moreछत्तीसगढ़ की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में लोकपरंपराएँ, लोकनृत्य, लोककला और जनजातीय जीवन प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान का सशक्त आधार प्रस्तुत करते हैं।
Read Moreखेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के तहत केरल की एथलेटिक्स टीम जगदलपुर पहुंची, जहां पारंपरिक लोकनृत्य से उनका भव्य स्वागत किया गया। 30 मार्च से शुरू होने वाले इस आयोजन में देशभर के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, जिससे बस्तर की संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
Read Moreछत्तीसगढ़ विशेषकर बस्तर में पाए जाने वाले छिंद वृक्ष का ऐतिहासिक, पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व। जैव विविधता संरक्षण से लेकर छिंद रस और गुड़ के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त करने की पहल पर विस्तृत आलेख।
Read Moreबस्तर पंडुम 2026 के समापन पर अमित शाह ने कहा कि बस्तर की पहचान अब संस्कृति और विरासत से होगी। 55 हजार प्रतिभागियों ने 12 विधाओं में किया प्रदर्शन।
Read Moreमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नारायणपुर प्रवास के दौरान गढ़बेंगाल घोटुल पहुंचकर बस्तर की लोक-संस्कृति, परंपरा और आदिवासी विरासत के संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
Read Moreमुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
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