छत्तीसगढ़ी संस्कृति

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तीजा-पोरा तिहार में झलकेगी छत्तीसगढ़ी संस्कृति, राजधानी रायपुर तैयार

रायपुर में 24 अगस्त को तीजा पोरा तिहार और महिला सम्मेलन का भव्य आयोजन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में करीब तीन हजार महिलाएं शामिल होंगी। आयोजन स्थल को छत्तीसगढ़ी लोक परंपरा से सजाया गया है। पारंपरिक खेल, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, छत्तीसगढ़ी व्यंजन और महिलाओं को विशेष उपहार इस कार्यक्रम की खासियत होंगे।

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मुख्यमंत्री निवास में हरेली पर सांस्कृतिक नृत्य से लेकर ठेठरी-चौसेला तक हर रंग में महकी लोकसंस्कृति

छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में पारंपरिक सजावट, लोकनृत्य, पारंपरिक व्यंजन और कृषि संस्कृति का भव्य प्रदर्शन हुआ, जिसने छत्तीसगढ़ी अस्मिता को जीवंत कर दिया।

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प्रसिद्ध हास्य कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे नहीं रहे, छत्तीसगढ़ सहित देश भर में शोक की लहर

डॉ. दुबे के निधन से साहित्य जगत में जो रिक्तता आई है, उसकी भरपाई संभव नहीं। परंतु उनकी कविताएं, व्यंग्य, मंचीय प्रस्तुति और छत्तीसगढ़ी के लिए उनका समर्पण उन्हें चिरस्मरणीय बना देता है। वे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कलम की शक्ति और शब्दों की गूंज हमेशा जीवित रहेगी।

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‘जशप्योर’ में बसी है छत्तीसगढ़ की खुशबू: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की सराहना

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित ‘जशप्योर’ ब्रांड के पारंपरिक उत्पादों की सराहना की। उन्होंने इसे ग्रामीण स्वावलंबन और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने वाला प्रेरक प्रयास बताया, जो ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को जमीनी स्तर पर साकार कर रहा है।

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प्राचीन छत्तीसगढ़ के रचयिता प्यारेलाल गुप्त की साहित्य साधना

रविशकर वि”वविद्यालय रायपुर से सन् 1973 में प्रकाशित इस ग्रंथ में प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग के पूर्व तक का श्रृंखलाबद्ध इतिहास है। इस ग्रंथ में न केवल प्राचीन छत्तीसगढ़ का इतिहास बल्कि सांस्कृतिक परम्पराओं, लोक कथाओं, पुरातत्व और साहित्य का उल्लेख है। इस ग्रंथ को ‘छत्तीसगढ़ का इनसाइक्लोपीडिया‘ माना जा सकता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पदयात्रा करके इस ग्रंथ के लिए सामग्री जुटायी थी।

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