आर्थिक असमानता

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RSS प्रमुख मोहन भागवत का विजयादशमी संबोधन: “भारत के पुनर्जागरण” का खाका, आतंकवाद से लेकर आर्थिक असमानता तक पर चिंता

मोहन भागवत का यह संबोधन न केवल संघ के भविष्य की दिशा तय करता है, बल्कि वर्तमान राष्ट्रीय और वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका पर भी गंभीर विमर्श प्रस्तुत करता है। उनका फोकस केवल चुनौतियों को चिन्हित करने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने समाधान की ओर भी स्पष्ट इशारा किया — “आत्मनिरीक्षण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता।”

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भारत में गरीबी घटने और अमीरी बढ़ने का दौर

भारत में एक ओर जहां अत्यधिक गरीबी में भारी गिरावट आई है, वहीं अमीरों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। यह आर्थिक प्रगति का संकेत है, लेकिन इससे आर्थिक असमानता पर भी नई बहस शुरू हो गई है।

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