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हिन्दू पहचान हम सबको जोड़ती है, धर्म स्वभाव और कर्तव्य है: भोपाल में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत

भोपाल में प्रमुख जन गोष्ठी में सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि हिन्दू पहचान समाज को जोड़ती है। उन्होंने धर्म, संघ की भूमिका और पंच परिवर्तन पर विस्तार से विचार रखे।

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संविधान की प्रस्तावना पर थोपे गए दो शब्द : समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता

आज प्रश्न तो यह भी उभरता है कि धर्मनिरपेक्ष जैसा कोई शब्द होता ही नहीं है – और विशेषतः भारत में तो कोई धर्मनिरपेक्ष हो ही नहीं सकता! हमारी श्रुति, गति, मति, रीति, नीति, प्रवृत्ति, प्राप्ति, स्मृति, कृति, स्तुति – आदि सभी कुछ तो स्थायी रूप से धर्म सापेक्ष है। फिर ‘धर्मनिरपेक्ष’ जैसे ‘अशब्द’ की भला भारत में क्या आवश्यकता है?

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