हंसा चल रे अपने देश : मनकही

मनुष्य जैसे यात्रा से पूर्व सारी चीजों को समेटना प्रारंभ कर देता है। वैसे ही जीवन यात्रा समाप्त होने से पूर्व जीवन मे जो मान-सम्मान, पद, प्रतिष्ठा, ईमानदारी, सभी कुछ सहेजने का  समय आ जाता है। मन में एक साध रहती है  किसी के साथ अन्याय न हो। ईमानदारी से जितना बन पड़े उतना काम तो कर लें क्योंकि दो दिन का जग मेला, अब चला चली का बेरा। मनुष्य अच्छे कर्म के द्वारा ही आने वाली पीढ़ियों के समक्ष अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत कर सदैव याद किया जाता है।

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कोरोना काल में भी कोई व्यक्ति भूखा ना सोएगा

भारत सरकार ने कोरोना महामारी से उत्पन्न बेरोजगारी के मद्देनजर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना 5 माह के लिए बढ़ा

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पढ़ेगा भारत-गढ़ेगा भारत-बढ़ेगा भारत : ऑनलाइन शिक्षा

मानव जीवन में भौतिक, आध्यत्मिक उन्नति के लिए शिक्षा अति आवश्यक है। शिक्षा वह ज्योति पुंज है जिसके  ज्ञानरूपी प्रकाश

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योग और संगीत दो शरीर एक आत्मा

संगीत स्वयं ब्रह्म नाद है और योग ब्रह्म तक पहुंचने का सोपान। प्रकृति लय ताल युक्त संगीत मय है और

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पर्यावरण संरक्षण में वैदिक कालीन उपाय आज भी खरे

जीवन और पर्यावरण का अटूट सम्बन्ध है। पर्यावरण में ही सूक्ष्म जीवाणु से लेकर कीड़े-मकोड़े, जीव-जंतु, पेड़-पौधे जन्म लेते और

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दृढ संकल्प और आत्मनियंत्रण द्वारा कोरोना से बचाव : मनकही

वैश्विक महामारी  कोरोना से जहां विश्व जूझ रहा है वहीं इसका सामना करने का सबसे महत्वपूर्ण उपाय सोशल डिस्टेंसी को

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