रायपुर जिले के 97 ग्राम पंचायतों में बनाया जा रहा गौठान, 10 ग्राम पंचायतें बन रही मॉडल

रायपुर/छत्तीसगढ़ सरकार की नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी की परिकल्पना तेजी से धरातल पर आकार ले रही है। रायपुर जिले के 97 ग्राम पंचायतों में स्थल का चयन कर गौठानों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इसमें जिले की 10 ग्राम पंचायतों को मॉडल के रूप में भी विकसित किया जा रहा है।
इन गौठानों के निमाण से जहां से गांवों में पशुओं को एक डे-केयर सेंटर का लाभ मिल सकेगा वहीं ये गौठान ग्रामीणों विशेषकर गांवों की महिला स्व सहायता समूहांे के अजीविका संवर्धन और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होेंगे।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गौरव कुमार सिंह लगातार इन ग्राम में पहुंचकर गौठान निर्माण की प्रगति की समीक्षा कर रहे वहीं गौठान के संचालन में महिला समूहों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण महिलाओं को प्रेरित भी कर रहे है।
ये गांव बन रहे मॉडल
जिले के जिन ग्राम पंचायतों को मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है उनमें अभनपुर विकासखण्ड के ग्राम पलौद, नवागांव, धनौद व तामासिवनी है। इसी तरह आरंग विकासखण्ड में बैहार, बनचरोदा, पारागांव व बेनीडीह, तिल्दा विकासखण्ड में बुडे़नी और धरसींवा विकासखण्ड में पथरी को लिया गया है।
डॉ.गौरव कुमार सिंह ने बताया कि इन गौठानों में पशुओं के पीने के पानी के लिए ट्यूबवेल और सोलरपंप लगाए जा रहे है। इसी तरह उनके बैठने के स्थान में पारंपरिक तरीके से घासफूस युक्त शेड का निर्माण, पशुओं के लिए पैरा की व्यवस्था में ग्रामीणों का सहयोग भी लिया जा रहा है।
गौबर खाद के लिए वर्मी बैड की व्यवस्था यहां की गई है। गौठानों के संचालन के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान की महिला स्वसहायता समूहों को जोड़ा जा रहा है ताकि वो यहां उत्पन्न होने वाले खाद और अन्य आय मूलक गतिविधियों से अपनी अजीविका का संवर्धन कर अपने को आत्मनिर्भर बना सके।
पशुओं को गौठानों में लाने तथा वहां 8 घण्टें तक रहने के लिए सभी तैयारियां की जा रही है। पशुओं की यहां नियमित रूप से उपस्थिति के लिए चरवाहो को भी प्रेरित किया जा रहा है। शीघ्र ही ये गौठान अपने पूर्ण रूप में कार्य करने के लगेंगे और ये शासन की मंशानुरूप ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ीकरण में अभिनव भूमिका निभाएंगे।

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