Category archives for: कला-संस्कृति

गाँव का वातावरण स्वाथ्यवर्धक क्यों होता है जानिए।

मिट्टी की दीवारों और खपरैल का बना गाँव का घर, तीनो भीषण मौसमों में सुखदायक होता है, ऐसा सुख कांक्रीट के बड़े भवनों में कहाँ? दो या तीन मुख्य कमरों के साथ सामने की परछी निवास के लिए उपयोग में लाई जाती है, मुख्य कमरों के ऊपर का पटाव धान इत्यादि उपज रखने के काम […]

धरती को मनुष्यों के बसने लायक बनाने वाले देवता को जानिए।

सनातन भारतीय संस्कृति में देवी/ देवताओं की आराधना की जाती है, इस संस्कृति की धारा में वैदिक, पौराणिक एवं लोक देवी/देवता होते हैं। इन देवी/देवों में लोक देवता मानव के सबसे करीबी माने जा सकते हैं क्योंकि ये स्वयं भू हैं, इनसे लोक का परिचय किसी ने नहीं करवाया, लोक इनसे स्वयं परिचित हुआ। वैदिक […]

बस्तर राजा ने क्यों बनवाया तालाब?

बात 1956-57 की है, बस्तर नरेश प्रवीण चंद भंजदेव वर्तमान कांकेर जिले के हल्बा गाँव के टिकरापारा पहुंचे, उनके स्वागत में सारा गाँव इकट्ठा हुआ। गाँव की चौपाल में उनके लिए खाट बिछाकर ग्रामीणों ने स्वागत किया, वे आकर खाट पर विराज गए। राजा के आगमन पर गाँव के सभी नागरिक इकट्ठे हो गए। राजा […]

सम्माक्का एवं सरलाम्मा को पूजने जुटते हैं एक करोड़ से अधिक आदिवासी

तेलंगाना के जयशंकर भूपालापल्ली जिले के मेदाराम में सम्माक्का सरलाम्मा जातरा पर मनाया जाता है, यह आदिवासियों के प्रमुख पर्व है जिसमें दो महिलाओं सम्माक्का और सरलाम्मा को देवी के रूप में पूजा जाता है। यहाँ इनका 12 वीं शताब्दी में निर्मित मंदिर भी जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन जुटते हैं। इस मेले में तेलंगाना के […]

जानिए शिल्पकार ने क्या चतुराई की

चतुर शिल्पकार वही होता है जो निर्माण सामग्री व्यर्थ न होने दे। ऐसी ही कुछ शिल्पकार की चतुराई हमें हम्पी के विट्ठल मंदिर स्थित विष्णु रथ में दिखाई देती है। विष्णु रथ का निर्माण एकाश्म शिला की बजाय पृथक पृथक खंड में हुआ है। जैसे काष्ठ रथ का निर्माण होता है उसी तरह प्रस्तर से […]

डायरी का पहला पन्ना धर्म पुत्र युधिष्ठिर : सम्पादक की कलम से

पुरानी डायरी का आखरी सफ़ा आज लिखा गया और डायरी के सभी पन्ने भर गए। कल सुबह से फ़िर एक नई डायरी का पहला पन्ना खुलेगा, कागज की सौंधी-सौंधी खुश्बू के साथ। पहले पन्ने पर लिखे पहले-पहले आखर मुस्काएगें पंक्तियों में। तितलियों की तरह रंगबिरंगे पंख फ़ड़फ़ड़ाएगें, स्वर्णिम अक्षर बनकर इतिहास में दर्ज होते जाएगें। […]

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