Category archives for: कला-संस्कृति

कौन हैं वे लोग जिन्होंने मनुष्य के जीवन की धारा बदल दी?

आदि मानव ने सभ्यता के सफ़र में कई क्रांतिकारी अन्वेन्षण किए, कुछ तो ऐसे हैं जिन्होने जीवन की धारा ही बदल दी। प्रथम अग्नि का अविष्कार था। उसके बाद मिट्टी में से धातूओं को पहचान कर उसका शोधन कर अलग करने की विधि की खोज हुई, लोगों ने आश्चर्य से मिट्टी को तांबा, लोहा, सोना, […]

राजिम कुंभ में बना विश्व कीर्तिमान

महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के पवित्र संगम पर छत्तीसगढ़ में चल रहे 15 दिवसीय राजिम कुंभ के आठवे दिन आज नदियों के संरक्षण और मानव कल्याण की भावना के साथ श्रद्धालुओं ने लगभग तीन लाख दीये जलाकर एक नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सहित सभी वरिष्ठजनों ने इसकी प्रशंसा की। […]

ढाई लाख दीयों के प्रकाश से आलोकित होगा राजिम कुंभ मेला

माघ पूर्णिमा 31 जनवरी से चल रहे राजिम कुंभ कल्प मेले में कल 7 फरवरी से विराट संत समागम शुरू होगा। संत समागम में देश भर के साधु-संतों और महात्माओं के आगमन पर उनके अभिनंदन की विशेष तैयारियां की गई है। विराट संत समागम के शुभारंभ पर साधु-संतों के स्वागत के लिए कुंभ स्थल पर […]

गाँव का वातावरण स्वाथ्यवर्धक क्यों होता है जानिए।

मिट्टी की दीवारों और खपरैल का बना गाँव का घर, तीनो भीषण मौसमों में सुखदायक होता है, ऐसा सुख कांक्रीट के बड़े भवनों में कहाँ? दो या तीन मुख्य कमरों के साथ सामने की परछी निवास के लिए उपयोग में लाई जाती है, मुख्य कमरों के ऊपर का पटाव धान इत्यादि उपज रखने के काम […]

धरती को मनुष्यों के बसने लायक बनाने वाले देवता को जानिए।

सनातन भारतीय संस्कृति में देवी/ देवताओं की आराधना की जाती है, इस संस्कृति की धारा में वैदिक, पौराणिक एवं लोक देवी/देवता होते हैं। इन देवी/देवों में लोक देवता मानव के सबसे करीबी माने जा सकते हैं क्योंकि ये स्वयं भू हैं, इनसे लोक का परिचय किसी ने नहीं करवाया, लोक इनसे स्वयं परिचित हुआ। वैदिक […]

बस्तर राजा ने क्यों बनवाया तालाब?

बात 1956-57 की है, बस्तर नरेश प्रवीण चंद भंजदेव वर्तमान कांकेर जिले के हल्बा गाँव के टिकरापारा पहुंचे, उनके स्वागत में सारा गाँव इकट्ठा हुआ। गाँव की चौपाल में उनके लिए खाट बिछाकर ग्रामीणों ने स्वागत किया, वे आकर खाट पर विराज गए। राजा के आगमन पर गाँव के सभी नागरिक इकट्ठे हो गए। राजा […]

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