हर्रा अब अराष्ट्रीयकृत वनोपज: छत्तीसगढ़ में संग्रहण की तैयारी शुरू

रायपुर, 03 सितम्बर 2014/छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में राज्य सरकार ने हर्रा खरीदी के लिए तैयारी शुरू कर दी है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में राष्ट्रीयकृत वनोपज हर्रा को अब अराष्ट्रीयकृत लघु वनोपज घोषित किया जा चुका है। मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड ने आज बताया कि हर्रा संग्रहण करने वाले ग्र्रामीणों से इसकी खरीदी के लिए केन्द्र सरकार ने इस वर्ष न्यूनतम संग्रहण मूल्य 11 रूपए प्रति किलो अर्थात ग्यारह सौ रूपए प्रति क्विंटल घोषित किया है। इस न्यूनतम समर्थन मूल्य पर राज्य सरकार ने हर्रा खरीदी का कार्य पिछले वर्षों की तरह इस बार भी प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से कराने का निर्णय लिया गया है। मुख्य सचिव ने यहां मंत्रालय से प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों, वन मंडलाधिकारियों तथा जिला वनोपज सहकारी संघों के प्रबंध संचालकों को परिपत्र भेजकर यह जानकारी दी है।

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मुख्य सचिव श्री ढांड ने अधिकारियों को संग्रहणकर्ता ग्रामीणों और वनवासी परिवारों के व्यापक हित में हर्रा खरीदी के लिए सभी जरूरी उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। परिपत्र में उन्होंने बताया है कि केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार ने छत्तीसगढ़ में हर्रा न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत खरीदने का निर्णय लिया है। इसके लिए राज्य में हर्रा को अराष्ट्रीयकृत वनोपज घोषित करने की अधिसूचना पिछले महीने की 19 तारीख को जारी की जा चुकी है। राज्य में हर्रा अब तक राष्ट्रीयकृत वनोपज था, इसलिए इसकी सम्पूर्ण मात्रा का संग्रहण प्रदेश की प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से कराया जाता था। हर्रा को अराष्ट्रीयकृत घोषित किए जाने से अब कोई भी इसका क्रय-विक्रय कर सकता है, लेकिन राज्य में हर्रा संग्राहकों को अधिक फायदा हो, इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत हर्रा संग्रहण के दिशा-निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।
उन्होंने परिपत्र में यह भी कहा है कि हर्रा खरीदी के न्यूनतम समर्थन मूल्य की जानकारी ग्राम पंचायतों को भी दी जाए और पंचायतों की ओर से ग्रामीण को यह सलाह दी जाए कि वे किसी भी व्यापारी को निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर हर्रा ना बेचे। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अन्य राज्यों से आने वाले हर्रा की खरीदी इस योजना में किसी भी स्थिति में नहीं की जाए। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी व्यापारी सस्ती दरों पर हर्रा खरीद कर संग्राहकों के फर्जी नामों से शासकीय खरीदी में शामिल न कर पाए। इसके लिए वन विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन को परस्पर समन्वय से निगरानी करनी होगी। उन्हें यह भी ध्यान में रखना होगा कि अन्य राज्यों से सस्ती कीमतों पर खरीदे गए हर्रा की बिक्री छत्तीसगढ़ राज्य में कोई भी व्यक्ति निर्धारित समर्थन मूल्य पर न कर सके। जिला कलेक्टरों द्वारा इसके आकस्मिक निरीक्षण के लिए उड़न दस्तों (लाइंग स्क्वायड) का भी गठन किया जाए।
परिपत्र में मुख्य सचिव ने कहा है कि हर्रा खरीदी के लिए आवश्यक 75 प्रतिशत राशि केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय और 25 प्रतिशत राशि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दी जाएगी। हर्रा खरीदी योजना के लिए वनोपज संघ के स्तर पर एक अलग बैंक खाता खोला गया है। इसी तरह जिला वनोपज सहकारी यूनियन के स्तर पर और प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के स्तर पर भी साल बीज संग्रहण के लिए खोले गए बैंक खाते का उपयोग हर्रा संग्रहण के लिए किया जाएगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हर्रा खरीदी के लिए संग्रहण केन्द्रों (फड़ों) का निर्धारण पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी प्राथमिक वनोपज समितियों द्वारा किया जाएगा। प्रत्येक फड़ में एक फड़ मुंशी तैनात रहेगा जिसका चयन स्थानीय व्यक्तियों में से किया जाए, जिसके पास हर्रा भण्डारण की उपयुक्त सुविधा हो। फड़ मुंशियों के चयन में अनुसूचित जनजाति वर्ग के सदस्यों को प्राथमिकता दी जाए। महिला स्वसहायता समूहों को भी फड़ मुुंशी के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। प्रत्येक हर्रा संग्रहण केन्द्र (फड़) में वनोपज का नाम, फड़ मुंशी का नाम, हर्रा संग्रहण के लिए न्यूनतम संग्रहण मूल्य आदि की जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी जानी चाहिए।
मुख्य सचिव ने परिपत्र मंें यह भी कहा है कि इस कार्य के लिए पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी फड़ मुंशियों, समिति प्रबंधकों, फड़ अभिरक्षकों और पोषक अधिकारियों को आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने परिपत्र में अधिकारियों को अच्छी गुणवत्ता का हर्रा संग्रहण के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने कहा है कि खरीदा जाने वाला हर्रा यथासंभव पीले, भूरे रंग का होना चाहिए। बहुत अधिक गीला, काला, सड़ा हुआ अथवा फंगस लगा हर्रा नहीं खरीदा जाए। संग्रहित हर्रा में कंकड़-पत्थर आदि की मिलावट नहीं होनी चाहिए। गुणवत्ता के लिए प्रथम दृष्टि में फड़ मुंशी, फड़ अभिरक्षक, समिति प्रबंधक और पोषक अधिकारी जिम्मेदार होंगे, लेकिन समस्त निरीक्षणकर्ता अधिकारी भी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देंगे और अगर कोई बड़ी अनियमितता होती है तो इसके लिए भी वह जिम्मेदार होंगे। अधिकांश संग्राहकों को तेन्दूपत्ता और हर्रा संग्रहण कार्ड दिया जा चुका है, जिसमें संग्रहण की मात्रा और संग्रहण पारिश्रमिक भुगतान की जानकारी दर्ज की जाएगी । यदि कोई नया संग्राहक है तो उसे कार्ड उपलब्ध कराया जाए। फड़ मुंशियों के कार्याें का पर्यवेक्षण फड़ अभिरक्षको, पोषक अधिकारियों, प्राथमिक वनोपज समिति प्रबंधकों, वन विभाग के अधिकारियों और कलेक्टर की ओर से नामांकित विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। चयनित गोदामों तक हर्रा परिवहन सरकारी ट्रकों से या मुख्य वन संरक्षक एवं पदेन महाप्रबंधक के द्वारा स्वीकृत खुली दरों से किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने परिपत्र में यह भी कहा है कि हर्रा खरीदी की राशि का भुगतान तेन्दूपत्ते के भुगतान की तरह किया जाएगा। याने पांच सौ रूपए तक नगद भुगतान होगा और जहां पर्याप्त बैंक सुविधा उपलब्ध है वहां पर पांच सौ रूपए से अधिक राशि का भुगतान बैंकों के माध्यम से ग्रामीणों के खाते में अथवा चेक के जरिए किया जाएगा। जहां पर्याप्त बैंक सुविधा नहीं है उन गांवों को तत्काल चिन्हांकित कर कलेक्टर और जिला वनोपज संघ के प्रबंध संचालक द्वारा निर्णय लेकर नगद राशि का भुगतान 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्य सचिव ने हर्रा संग्रहण के राशि भुगतान के संबंध में जिला कलेक्टरों को बैंक अधिकारियों के बैठक लेने के निर्देश दिए हैं। खरीदी के लिए जिला वनोपज संघों द्वारा आवश्यक राशि प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों को दी जाएगी।

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Posted by on Sep 3 2014. Filed under खेत-खलिहान, छत्तीसगढ. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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