वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियम 2009 लागू

राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और सुरक्षा के लिए ‘छत्तीसगढ़ माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियम 2009’ बनाए गए हैं, जिसके तहत राज्य के वरिष्ठ नागरिक तथा माता-पिता भरण-पोषण के लिए पुत्र तथा पुत्री अथवा रक्त संबंधी के विरूध्द अधिकरण में आवेदन कर सकते हैं। इस प्रकार भरण-पोषण नियम के तहत माता-पिता तथा वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एक कानूनी अधिकार बना दिया गया है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने ये नियम माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 की धारा 32 द्वारा दिए गए शक्तियों के तहत बनाए हैं। ये नियम विगत 07 मई को छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से राज्य में लागू हैं। राज्य में छत्तीसगढ़ माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियम 2009 नियम लागू होने के बाद प्रदेश के ऐसे माता-पिता जो स्वयं की आय या अपनी सम्पत्ति की आय से अपना भरण-पोषण करने में समक्ष नहीं है वे अपने वयस्क बच्चों अथवा रक्त संबधी के विरूध्द राज्य सरकार द्वारा गठित अधिकरण के समक्ष आवेदन कर सकते हैं। भरण-पोषण के अन्तर्गत भोजन, आवास, कपड़े, सुरक्षा और चिकित्सा भी शामिल हैं। आवेदन के निपटारे के लिए नियम के तहत समझौता अधिकारियों की नियुक्ति और भरण-पोषण अधिकरण के गठन का भी प्रावधान है।
छत्तीसगढ़ भरण-पोषण तथा कल्याण नियम के तहत अधिकरण नियमानुसार विरोधी पक्षकार को आवेदक (वरिष्ठ नागरिक अथवा माता-पिता) के भरण-पोषण के लिए अधिकतम दस हजार रूपए तक भुगतान करने का आदेश दे सकता है। इसके अलावा नियम के अन्तर्गत निर्धन वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृध्द आश्रमों के प्रबंधन हेतु योजना बनाने का भी प्रावधान है। इन नियमों के तहत संबंधित जिला मजिस्ट्रेट का दायित्व होगा कि वरिष्ठ नागरिकों का जीवन और सम्पत्ति सुरक्षित हो और वे सुरक्षा तथा सम्मान के साथ जीवन यापन कर सके। नियम में यह भी उल्लेख है कि जिला पुलिस अधीक्षक और पुलिस आयुक्त वाले शहरों में ऐसे पुलिस आयुक्त राज्य शासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार वरिष्ठ नागरिकों के जीवन और सम्पत्ति की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। प्रत्येक पुलिस थाना अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले वरिष्ठ नागरिकों की अद्यतन सूची रखेंगे। विशेषत: उनकी जो अकेले रह रहे हैं। पुलिस थाने का एक प्रतिनिधि जहां तक संभव हो सके सामाजिक कार्यकर्ता या स्वयं सेवी के साथ ऐसे वरिष्ठ नागरिकों के यहां नियमित अन्तराल पर कम से कम एक माह में एक बार जाएंगे। इसके अलावा उनसे सहायता का निवेदन प्राप्त होने पर त्वरित गति से यथासंभव वहां दौरा करेंगे। वरिष्ठ नागरिकों की शिकायतों और समस्याओं पर स्थानीय पुलिस द्वारा तत्परता से ध्यान दिया जाएगा। वरिष्ठ नागरिकों की राज्य परिषद और जिला समितियों के गठन का प्रावधान भी किया गया है। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और सुरक्षा के लिए इस कल्याण नियम के तहत अनेक प्रावधान किए गए हैं।  नियम के संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए सात मई 2010 के छत्तीसगढ़ राजपत्र का अवलोकन किया जा सकता है।

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