रायपुर साहित्य महोत्सव : तीन दिवसीय साहित्य मेला सम्पन्न

रायपुर, 16 दिसम्बर 2014/ हिन्दी और छत्तीसगढ़ के आंचलिक साहित्य पर केन्द्रित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य महोत्सव राज्य और देश के विभिन्न प्रदेशों से आए साहित्यकारों, कलाकारों, साहित्य प्रेमियों और प्रबुद्ध नागरिकों के दिलों में अमिट छाप छोड़कर सम्पन्न हो गया। राज्य की परम्पराआंे और सांस्कृतिक धरोहरों के प्रमुख केन्द्र पुरखौती मुक्तांगन में इस राष्ट्रीय आयोजन के समापन समारोह को मुख्य अतिथि की आसंदी से केन्द्रीय पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने तथा अध्यक्षीय आसंदी से गोवा की राज्यपाल डॉ. (श्रीमती) मृदुला सिन्हा ने सम्बोधित किया। विशेष अतिथि के रूप में प्रदेश के पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री अजय चंद्राकर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और उनकी सरकार को बधाई दी तथा नोडल विभाग के रूप में जनसम्पर्क विभाग की भूमिका की विशेष रूप से प्रशंसा की। समापन समारोह महोत्सव के गजानन माधव मुक्तिबोध मंडप में आयोजित किया गया।
lal ramkumar
 मुख्य अतिथि की आसंदी से समारोह में केन्द्रीय पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने इस अवसर पर कहा – भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। भारत की राष्ट्रीय एकता को पूरी दुनिया आश्चर्य की निगाह से देखती है। विदेशियों में इस बात को लेकर उत्सुकता देखी जाती है कि आखिर वह कौन सी शक्ति है जो इस देश को तमाम सांस्कृतिक विभिन्नताओं के बावजूद एकजुट किए हुए हैं। डॉ. शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ बनाने और मानवीय मूल्यों के संरक्षण में साहित्यकारों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। डॉ. शर्मा ने कहा साहित्यकारों के विचारों में विभिन्नता हो सकती है। यह बहुत स्वभाविक है। क्योंकि अगर सब लोगों के विचार एक जैसे हो जाएं तो जिन्दगी रूक जाएगी और नए तथ्यों की खोज भी नहीं हो पाएगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा रायपुर साहित्य महोत्सव के आयोजन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और उम्मीद जताई कि साहित्यकारों के तीन दिवसीय विचार मंथन से निकलने वाले निष्कर्षों से  छत्तीसगढ़ की धरती सिंचिंत होगी और यहां से निकली स्वर लहरियां पूरे देश को नई दिशा देगी। केन्द्रीय पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री ने महोत्सव के समापन समारोह में अपने तीन घंटे के सिरपुर प्रवास का भी उल्लेख किया। उन्होंने सिरपुर में पर्यटन की संभावनाओं को भी रेखांकित किया। अध्यक्षीय आसंदी से समारोह को सम्बोधित करते हुए गोवा की राज्यपाल डॉ. (श्रीमती) मृदुला सिन्हा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने साहित्य महोत्सव का आयोजन करके भारत माता के घर में संकल्पों के दीप प्रज्जवलित करने का सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने इस आयोजन को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की संवेदनशील पहल बताया और आयोजन की प्रशंसा की।
lalit lalitya
श्रीमती सिन्हा ने साहित्यकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप सबने यहां तीन दिनों तक विचार मंथन किया है। इस मंथन से निकलने वाला अमृत सम्पूर्ण समाज और संस्कृति को स्वस्थ रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि साहित्य महोत्सव के जरिए समाज निर्माण की पहल हुई है। पूरे देश में विकास का एक नया वातावरण बन रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकास को सरकारी आयोजन नहीं बल्कि जन आंदोलन बनाने का आव्हान किया है, इसमें साहित्यकार और प्रबुद्धजन मिलकर सरकार को दिशा दे सकते हैं। श्रीमती मृदुला सिन्हा ने साहित्यकारों को देश और समाज का अनिर्वाचित प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कहा कि साहित्यकार अपने विचारों से अपने समय के समाज को और देश को सही दिशा देते हैं। श्रीमती सिन्हा ने साहित्यकारों का आव्हान किया कि वे स्वच्छ भारत अभियान से भी जुड़े और उसके लिए जन-जागरण में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने साहित्यकारों से यह भी आग्रह किया कि वे नकारात्मक सोच को तिलांजलि दे और सकारात्मक चिंतन से जुड़कर समाज का मार्गदर्शन करें। देश और समाज को एक रखने में, परिवारों को विखण्डन से बचाने और वृद्धजनों के संरक्षण के लिए, साहित्यकार अपनी लेखनी के जरिए बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं। श्रीमती सिन्हा ने समाज के लिए अच्छे साहित्य की जरूरत पर भी बल दिया। विशेष अतिथि की आसंदी से प्रदेश के पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री अजय चंद्राकर ने अपने उदबोधन में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विशेषताओं पर प्रकाश डाला। श्री चंद्राकर ने भी उम्मीद जताई कि रायपुर साहित्य महोत्सव के प्रथम आयोजन में शामिल हुए साहित्यकारों के विचारों और निष्कर्षों से राज्य को और देश को दिशा मिलेगी। श्री चंद्राकर ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी सांस्कृतिक और कला परम्पराओं की दृष्टि से काफी धनवान है। हर युग में और हर काल में साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की प्रभावी भूमिका रहती आई है।
3026
राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य और कलाओं के विकास में इस नवोदित राज्य का मूल्यांकन होना अभी बांकी है, लेकिन हमारे यहां पंडित माधव राव सप्रे द्वारा स्थापित पत्रकारिता की एक सौ वर्ष से भी ज्यादा पुरानी परम्परा है। पंडित मुकुटधर पाण्डेय, गजानन माधव मुक्तिबोध, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और हबीब तनवीर जैसी विभूतियों ने इस राज्य का गौरव बढ़ाया है। एशिया का पहला संगीत विश्वविद्यालय हमारे छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में पचास वर्ष से भी ज्यादा समय से संचालित हो रहा है। छत्तीसगढ़ी भाषा का पहला व्याकरण एक सौ वर्ष पहले श्री हीरालाल काब्योपाध्याय द्वारा लिखा जा चुका है। श्री अजय चंद्राकर ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शहीद वीरनारायण सिंह के योगदान का भी उल्लेख किया। विशेष अतिथि की आसंदी से प्रदेश के पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री अजय चंद्राकर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। श्री चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि और राज्य के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि नालंदा से भी प्राचीन हमारा सिरपुर है। उन्होंने केन्द्रीय पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री से छत्तीसगढ़ में धर्म और दर्शन के अध्ययन के लिए केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के बारे में विचार करने का अनुरोध किया और राज्य के साहित्य और पुरातत्व के संरक्षण और संवर्धन में केन्द्रीय सहयोग की जरूरत बताई। श्री अजय चंद्राकर ने साहित्य महोत्सव के आयोजन में नोडल विभाग के रूप में जनसम्पर्क विभाग तथा अन्य समस्त सहयोगी विभागों और महोत्सव को सफल बनाने में साहित्यकारों, कलाकारों तथा साहित्य प्रेमियों की भागीदारी के लिए आभार प्रकट किया। डॉ. राजेन्द्र मिश्रा ने भी अपने विचार प्रकट किए। समारोह में आभार प्रदर्शन जनसम्पर्क विभाग के संचालक श्री रजत कुमार ने किया। इस अवसर पर जनसम्पर्क विभाग के प्रमुख सचिव श्री अमिताभ जैन सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार तथा प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।

Short URL: http://newsexpres.com/?p=1255

Posted by on Dec 16 2014. Filed under कला-संस्कृति, छत्तीसगढ, साहित्य. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

Leave a Reply

Photo Gallery

Log in | Designed by R.S.Shekhawat