यूँ न इतराओ अहले करम जिंदगी

यूँ न इतराओ अहले करम जिंदगी

वक्त जालिम है सुन  बेरहम जिंदगी


इक शरारे में पैबस्त है आफताब

आज़माइश न कर बेशरम जिंदगी


ख्वाब, उम्मीद, रिश्तों की कारीगरी

गम  में लिपटी हुई खुशफहम जिंदगी


उम्र भर का सफर मिल न पाई मगर

साहिलों की तरह हमकदम जिंदगी


छोड़ आये खुदी को बहुत दूर हम

दो घड़ी तो ठहर मोहतरम जिंदगी


चल कहीं इश्क की चाँदमारी करें

कुछ तो होगा वफ़ा का वहम जिंदगी


सख्त सच सी कभी ख्वाब सी मखमली

कुछ हकीकत लगी कुछ भरम जिंदगी


रूठ कर और ज्यादा सलोनी लगी

बेवफा है मगर है   सनम  जिंदगी


धड़धड़ाती हुई रेल का इक सफर

मौत की मंजिलों पर खतम जिंदगी

अहले करम-एहसान करने वाला

शरारा-चिंगारी

आफताब-सूरज

पद्म सिंह – ०६/०१/२०११

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