युवा साहित्यकार-पत्रकार शशिकांत साहू नही रहे, सारंगढ पत्रकार जगत में शोक

शशिकांत साहू
शशिकांत साहू

कोसीर/ सारंगढ अंचल के युवा साहित्यकार पत्रकार शशिकांत साहू अब हमारे बीच नही रहे । आज उस समय सारंगढ अंचल के सभी वर्ग स्तभ्ध रह गए जब खबर आई कि शशिकांत साहू का निधन हो गया। शशिकांत 7 जून को देर रात किसी भोजनालय से भोजन कर घर आया और घर की छत पर सोया, जब सुबह नहीं उठा तब घर वाले घबराए, डाक्टर ने अस्पताल में मृत घोषित कर दिया। डाक्टर मान रहे हैं प्रथम दृष्टि में शशिकांत साहू की हृदयघात से मृत्यु हुई है । पर संदेह भी जन्म लेता है। पोस्टमार्टम के बाद परिवार को शव को सौंप दिया गया। आज सारंगढ मुक्तिधाम में रीति-.रिवाज के साथ दाह संस्कार किया गया।

संभ्रांत परिवार में 15 जुलाई 1979 को जन्मे शशिकांत साहू, गंगाराम साहू के ज्येष्ठ पुत्र थे। उनका जन्म स्थान रायपुर जिला के सेल कसडोल में हुआ था। शशि के पिता गंगाराम सारंगढ नगर पंचायत में कर्मचारी है और उन्होने सारंगढ के कुटेला गांव को निवास बनाया। स्नातक की शिक्षा सारंगढ में हुई पिछले एक दशक से साहित्य सृजन और पत्रकारिता में सक्रिय रहे इस बीच कई समाचार पत्रो में संवाददाता रहे।

सारंगढ की पत्रकारिता में जब तक थे सक्रिय योगदान रहा । इस बीच अंचल के युवा साहित्यकार/पत्रकार शशिकांत साहू ने साहित्य सृजन में काव्यों की रचना की। जिसमें सर्वप्रथम काव्य संग्रह “जोगी कथा मेरी ब्यथा” प्रकाशित हुई। काव्य संग्रह का विमोचन छत्तीसगढ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी व गृह मंत्री स्वर्गीय नन्दकुमार पटेल द्वारा किया गया था। उसके बाद कई काब्य संग्रह रचे, जिसमें क्या होगा ,रूपांजली ,पल दो पल प्रमुख काव्य संग्रह हैं। अंचल के युवा साहित्यकार पत्रकार शशिकांत साहू के और कई काब्य संग्रह आने आले थे जिसमें वो प्यार ये दोस्ती ,मौत ही मंजिल है, जिन्दगी के सफर का और मेरी अर्थी उसकी डोली। पर अब वे हमारे बीच नही रहे, उनका सफ़र सम्पन्न हो गया। असमय हमारा साथ छोड जाने से साहित्य जगत और पत्रकारिता का एक सिपाही अब नही रहा। उन्हें विन्रम श्रद्धांजलि……

लक्ष्मी नारायण लहरे

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