मुख्यमंत्री ने शिक्षक को लगाया फ़ोन

रायपुर/ 15 जून 2014/ नक्सल हिंसा पीड़ित ग्रामीण क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल शिक्षक ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि किसी दिन स्वयं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का फोन सीधे उनके मोबाइल पर आएगा। सहज-सरल स्वभाव के इस अध्यापक को उस समय सुखद आश्चर्य हुआ जब मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने स्वयं राजधानी रायपुर से टेलीफोन कर शिक्षकीय कार्य में उनकी कर्त्तव्य निष्ठा और उनके स्कूल बोर्ड परीक्षाओं के शानदार परीक्षा परिणामों के लिए उन्हें बधाई दी। श्री कीर्तनिया छत्तीसगढ़ के पहले ऐसे ग्रामीण शिक्षक हैंए जिनसे प्रदेश के मुखिया ने स्वयं टेलीफोन पर सीधा सम्पर्क किया है।

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ये शिक्षक हैं उत्तर बस्तर जिले के पंखाजूर क्षेत्र के ग्राम गोंडाहूर के श्री अरूण कीर्तनिया जो वहां के शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्रभारी प्राचार्य भी हैं। अध्यापन कार्य के प्रति श्री कीर्तनिया की समर्पण भावना से उनके स्कूल को मिली प्रसिद्धि के बारे में मुख्यमंत्री को जब जानकारी मिली तो उन्होंने अधिकारियों को श्री कीर्तनिया का मोबाइल नम्बर पता लगाने के लिए कहा। मोबाइल नम्बर मिलने पर मुख्यमंत्री ने स्वयं उन्हें फोन लगाया और कहा कि आपने अन्य शिक्षकों के लिए भी एक उदाहरण पेश किया है। इसी तरह लगन और मेहनत से अपने कर्त्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ते रहिए राज्य सरकार आपके साथ है।
उल्लेखनीय है कि श्री कीर्तनिया ने अपनी सूझ-बूझ और मेहनत से तथा अपने सहकर्मी शिक्षकों के सहयोग से इस गांव में जनजागरण का ऐसा अभियान चलाया जिससे नक्सल आतंक को दरकिनार कर गांव तथा आसपास के सभी परिवारों के लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने लगे और यह हायर सेकेण्डरी स्कूल अपने सर्वश्रेष्ठ परीक्षा परिणामों की वजह से पूरे जिले में प्रसिद्ध हो गया। इस बार छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की बारहवीं कक्षा की परीक्षा में इस विद्यालय का रिजल्ट शत-प्रतिशत रहा। बारहवीं के सभी 104 बच्चे पास हो गए और इनमें से 70 बच्चों ने प्रथम श्रेणी में और 33 बच्चों ने द्वितीय श्रेणी तथा एक बच्चे तृतीय श्रेणी में सफलता हासिल की। इसी तरह इस वर्ष दसवीं बोर्ड में दर्ज 82 बच्चों में से 80 बच्चों ने परीक्षा पास कर ली रिजल्ट 98 प्रतिशत रहा। इतना ही नहीं बल्कि इस वर्ष उनके स्कूल के मनोरंजन नामक एक बच्चे ने पीएमटी परीक्षा में भी बाजी मार ली।
श्री कीर्तनिया ने बताया कि आठ दिसम्बर 1997 को जब उन्होंने इस विद्यालय का प्रभार संभाला उन दिनों वहां नक्सल आतंक की वजह से गांव के लोग बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते थे। कक्षाओं में उपस्थिति काफी कम होती थी। श्री कीर्तनिया ने स्वयं और अपने सहकर्मी शिक्षकों को साथ लेकर ग्रामीणों को समझाया कि उनके बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए शिक्षा बहुत जरूरी है। ग्रामीणों में आस्था और विश्वास जाग्रत हुआ। बच्चे वहां पढ़ाई के लिए उत्साह के साथ आने लगे। श्री कीर्तनिया का यह स्कूल अब पखांजूर इलाके साथ पूरे जिले में शिक्षा के एक आदर्श केन्द्र के रूप में ख्याति अर्जित कर रहा है। उनके स्कूल में वर्ष 2010 में छात्र समीर दत्त ने बारहवीं बोर्ड परीक्षा में 95/8 प्रतिशत अंकों के साथ सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में चौथा स्थान प्राप्त किया था।

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